सोलन : चोरी हुए लाइसेंसी बंदूक-कारतूस जंगल से बरामद, पुलिस जांच में जुटी…

लाइव हिमाचल/सोलन : सोलन धर्मपुर के मझोलटी भारती गांव में एक लाइसेंसी बंदूक और तीन कारतूस चोरी होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। दिनांक 27 अप्रैल को गाँव मझोलटी भारती निवासी लीलादत ने पुलिस थाना धर्मपुर में रिपार्ट दर्ज करवाई कि दिनांक 25-04-2025 को इन्होने अपनी लाइसेंसी बन्दूक को सफाई करने के उपरांत अपने घर में पूजा के कमरा में रख दिया था तथा कमरा के दरवाजे को अच्छी तरह से कुण्डी लगाकर बंद कर दिया था। दिनाक 27-04-2025 को जब यह उक्त कमरा में पूजा करने के लिए गए तो इनकी लाइसेंसी बन्दूक 12 बोर व 03 कारतूस वहां से गायब पाए गए। वहीं एसपी गौरव सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि शिकायतकर्ता लीलादत ने अपने स्तर पर बंदूक की तलाश की, लेकिन वह कहीं नहीं मिली। उन्हें शक है कि 26 अप्रैल को दिन के समय कोई अज्ञात व्यक्ति उनकी बंदूक चुराकर ले गया। इस शिकायत के आधार पर धर्मपुर पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया। एसपी गौरव सिंह ने बताया कि धर्मपुर पुलिस ने इस पर त्वरित करवाई करते हुए चोरी हुई बंदूक को लीलादत के घर के पास जंगल में झाड़ियों के बीच से बरामद किया है। बंदूक और कारतूस को पुलिस ने कब्जे में ले लिया है। फिलहाल अभी पुलिस यह पता लगाने में कोशिश कर रही है कि बंदूक चोरी करने वाला व्यक्ति कौन था। इस मामले में संदिग्धों की तलाश के लिए पुलिस गहनता से जांच कर रही है।

डिजिटल अरेस्ट कर 8 लाख 50 हजार रुपये की ठगी, आरोपियों को सोलन पुलिस ने इंदौर से किया गिरफ्तार…

लाइव हिमाचल/धर्मपुर : हिमाचल प्रदेश के धर्मपुर में पिछले साल नवंबर में एक व्यक्ति से हुई लाखों रुपये की साइबर ठगी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। धर्मपुर पुलिस ने इस मामले में मध्य प्रदेश के इंदौर से तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एसपी गौरव सिंह ने बताया कि 15 नवंबर 2024 को धर्मपुर पुलिस थाने में एक शिकायत दर्ज की गई थी। शिकायत के अनुसार,गत वर्ष 11 नवंबर को पीड़ित को एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को टेलीकॉम अधिकारी बताया। कॉलर ने दावा किया कि पीड़ित के मोबाइल नंबर से अवैध गतिविधियां हो रही हैं और यह नंबर उनके आधार कार्ड से खरीदा गया है। कॉलर ने कहा कि नंबर पर एफआईआर दर्ज है और आधार कार्ड का दुरुपयोग हो रहा है। इसके बाद कॉल को कथित तौर पर मुंबई पुलिस के अधिकारी संदीप राव को ट्रांसफर किया गया। संदीप राव ने पीड़ित को डराने के लिए वीडियो कॉल पर एक व्यक्ति को पुलिस अधिकारी के रूप में पेश किया, जो कार्यालय जैसे माहौल में बैठा था। इस व्यक्ति ने पीड़ित को कमरे में बंद होने, कमरे का वीडियो दिखाने और बैंक खातों की जानकारी देने का दबाव बनाया। आरोपियों ने फर्जी एफआईआर, गिरफ्तारी आदेश और आरबीआई के कथित दस्तावेज दिखाकर पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग और अपराधी नरेश गोयल से कथित संबंध का भय दिखाया। एक अन्य व्यक्ति, जो खुद को एडीजी विशेष्वर पाटिल बता रहा था, ने पीड़ित को जांच में सहयोग करने का लालच दिया। आरोपियों ने पीड़ित को एक लिंक और केस नंबर भेजकर सर्च करने को कहा, जिसमें फर्जी गिरफ्तारी आदेश और आरबीआई दस्तावेज दिखाए गए। डर के मारे पीड़ित और उनके बेटे ने अपराधियों के कहने पर 50,000 रुपये गूगल पे के जरिए बंधन बैंक के खाते में और 8,00,000 रुपये एनईएफटी के माध्यम से अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिए। कुल 8,50,000 रुपये की ठगी के बाद आरोपियों ने फोन बंद कर लिया। बाद में पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। एसपी गौरव सिंह ने बताया कि धर्मपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संदिग्ध बैंक खातों, मोबाइल डेटा और साइबर साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया। इस आधार पर पुलिस ने 25 अप्रैल 2025 को मध्य प्रदेश के इंदौर से तीन आरोपियों—महेश पाटीदार (38), रोहित कररे उर्फ रोहण कररे (33), और श्याम कुमार (38)—को गिरफ्तार किया। इंदौर कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड पर लाए गए इन आरोपियों को सोलन कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि श्याम कुमार और महेश पाटीदार के खिलाफ पहले भी आपराधिक मामले दर्ज हैं। श्याम के खिलाफ शाजापुर (मध्य प्रदेश) में धोखाधड़ी और महेश के खिलाफ खरगोन में मारपीट का मामला दर्ज है। एसपी गौरव सिंह ने कहा कि यह गिरफ्तारी साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कामयाबी है, और पुलिस इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों का पता लगाने के लिए गहन जांच कर रही है।

दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ एंटी करप्शन ब्रांच ने दर्ज की FIR…

नेशनल डेस्क : दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन पर 2000 करोड़ रुपये के क्लासरूम घोटाले में ACB ने FIR दर्ज की है. दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल के दौरान स्कूलों में बनाए गए क्लासरूम्स बनाने की प्रक्रिया में हुए भारी भ्रष्टाचार को लेकर एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) की ये बड़ी कार्रवाई है. ACB ने दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया और पूर्व लोक निर्माण मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया है. यह मामला करीब 2000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़ा है, जो 12,748 क्लासरूम और इमारतों के निर्माण में सामने आया है. ACB की जांच में खुलासा हुआ है कि क्लासरूम्स को Semi-Permanent Structure (SPS) रूप में बनाया गया, जिसकी उम्र 30 साल होती है, लेकिन इसकी लागत RCC (Pucca) क्लासरूम्स के बराबर निकली, जिसकी उम्र 75 साल होती है. परियोजना का ठेका 34 ठेकेदारों को दिया गया, जिनमें से अधिकांश का संबंध आप पार्टी से बताया गया है. सभी काम निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे नहीं किए गए और लागत में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई. सलाहकार और आर्किटेक्ट की नियुक्ति तय प्रक्रिया के बिना की गई और इन्हीं के ज़रिए लागत बढ़ाई गई. CVC (Central Vigilance Commission) की रिपोर्ट में परियोजना में कई गड़बड़ियों को उजागर किया गया था, लेकिन यह रिपोर्ट करीब तीन साल तक दबाकर रखी गई।

दिल्ली क्लासरूम घोटाला: मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन पर ACB की FIR, अहम प्वाइंट्स

  •  FIR दर्ज: दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और पूर्व PWD मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने 2000 करोड़ रुपये के कथित क्लासरूम निर्माण घोटाले में FIR दर्ज की है.
  • घोटाले का दायरा: यह घोटाला 12,748 क्लासरूम और स्कूल भवनों के निर्माण से जुड़ा है, जिसमें कुल लागत 2,892.65 करोड़ रुपये तक पहुंची. ACB की रिपोर्ट के अनुसार, लागत को असामान्य रूप से बढ़ाया गया.
  • SPS vs RCC लागत: क्लासरूम्स को सेमी-पर्मानेंट स्ट्रक्चर (SPS) के रूप में बनाया गया, जिसकी उम्र 30 साल है, लेकिन लागत RCC (पक्के) भवनों (75 साल उम्र) जितनी थी. SPS की लागत 2292 रुपये प्रति वर्ग फीट थी, जो RCC की लागत (2044-2416 रुपये प्रति वर्ग फीट) के बराबर थी.

बीजेपी नेताओं ने दर्ज कराई थी शिकायत

शिकायतें भाजपा प्रवक्ता हरीश खुराना, विधायक कपिल मिश्रा और नीलकंठ बक्शी द्वारा दर्ज कराई गई थीं. रिपोर्ट के अनुसार, सामान्यतः एक क्लासरूम का निर्माण 5 लाख रुपये में हो सकता था, लेकिन इस परियोजना में यह लागत 24.86 लाख रुपये प्रति कक्षा तक पहुंच गई. CVC की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि SPS निर्माण की लागत Rs. 2292 प्रति वर्ग फीट तक पहुंच गई, जो कि पक्के स्कूल भवनों की लागत Rs. 2044 – 2416 प्रति वर्ग फीट के लगभग बराबर है।

बिना टेंडर कैसे बढ़ी लागत

इस मामले में बिना नए टेंडर के कुल Rs. 326.25 करोड़ की लागत बढ़ाई गई, जिनमें Rs. 205.45 करोड़ सिर्फ ‘रिचर स्पेसिफिकेशन’ के कारण खर्च हुए. ACB ने इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 17-A के तहत अनुमति मिलने के बाद FIR दर्ज की है. FIR संख्या 31/2025 को IPC की धारा 409, 120-B और POC एक्ट की धारा 13(1) के तहत दर्ज किया गया है।

कांगड़ा के नगरोटा बगवां में जंगल में लगी आग…

लाइव हिमाचल/कांगड़ा: कांगड़ा जिले के नगरोटा बगवां कस्बे के पास राजियाना गांव के पास चीड़ के जंगलों में आग लग गई, जिससे आस-पास की बस्तियों में रहने वाले लोगों में दहशत फैल गई। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, आग रात में लगी और सुबह तक पूरी तरह से आग में तब्दील हो गई। इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक, जिला प्रशासन और वन विभाग की टीमें आग पर काबू पाने के लिए काम कर रही थीं। आग को फैलने से रोकने के लिए खाइयाँ खोदी जा रही थीं और आग बुझाने के लिए दमकल गाड़ियों को तैनात किया गया था। हालाँकि, जंगल की ज़मीन पर सूखी चीड़ की सुइयों की मोटी परतों ने आग बुझाने के प्रयासों को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया था। धर्मशाला क्षेत्र में चीड़ के जंगल जंगल की आग के लिए जाने जाते हैं। पिछले कुछ दशकों में, वन विभाग ने चीड़ के पेड़ों को उनकी उच्च जीवित रहने की दर के कारण अधिक से अधिक लगाया है। आज, धर्मशाला सर्कल में कुल वन क्षेत्र का लगभग 20 प्रतिशत चीड़ के जंगल हैं, जो लगभग 27,910 हेक्टेयर में फैले हैं।

हालांकि, चीड़ के पेड़ों के प्रभुत्व ने पारिस्थितिकी और प्रबंधन संबंधी चुनौतियां भी पैदा की हैं। चीड़ के पेड़ अपने ऐलेलोपैथिक गुणों के लिए जाने जाते हैं – वे जैव-रासायनिक पदार्थ छोड़ते हैं जो उनके आस-पास की अन्य वनस्पतियों के विकास को रोकते हैं। नतीजतन, इन जंगलों में घास या झाड़ियाँ बहुत कम होती हैं, केवल ज्वलनशील चीड़ की सुइयाँ बचती हैं जो शुष्क मौसम के दौरान मोटी परतों में जमा हो जाती हैं। यह संचय एक महत्वपूर्ण आग का खतरा बन जाता है, खासकर गर्मियों के महीनों के दौरान। वन अधिकारियों का कहना है कि इनमें से कई आग मानव निर्मित हैं – या तो गलती से या जानबूझकर लगाई गई हैं। कुछ मामलों में, किसान इस उम्मीद में चीड़ के जंगलों में आग लगाते हैं कि मानसून के बाद ताजा घास उग आएगी, जिससे पशुओं के लिए चारा उपलब्ध होगा।

जयराम ठाकुर का सुक्खू सरकार पर हमला, बोले- ये औरंगजेब की तरह जजिया टैक्स…

लाइव हिमाचल/शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ने मंगलवार (29 अप्रैल) को कांग्रेस पर जमकर हमला बोला. ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार अपने हिंदू विरोधी रवैये से बाज नहीं आ रही है. मुख्यमंत्री कभी हिंदू विरोधी बयान तो कभी हिंदुओं के खिलाफ कोई न कोई योजना लेकर आते हैं. पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा, “अब सुक्खू सरकार ने हिंदुओं की धार्मिक यात्रा पर ही शुल्क लगा दिया है. चूड़धार की यात्रा करने वाले हिंदू धर्मावलंबियों से सरकार शुल्क वसूल रही हैं. अब शिरगुल महाराज के यहां माथा टेकने पर भी सरकार लोगों से पैसे वसूल रही है. जिसका स्थानीय लोगों द्वारा भारी विरोध किया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा, “अपने प्रदेश के अंदर ही धार्मिक यात्रा पर लोगों से शुल्क वसूल करना कांग्रेस सरकार की मंशा साफ दिखाता है. सुक्खू सरकार को शुल्क लगाने की लत लग गई है. कांग्रेस की इस सरकार को मात्र दो सालों में ही ‘शुल्क की सरकार’ बन गई है. अब तो सरकार ने नवजातों के जन्म प्रमाण पत्र में सुधारने के लिए भी पांच गुना पैसा वसूल रही है.” उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि अब चूड़धार की धार्मिक यात्रा करने वाले श्रद्धालु यात्रा करने के बदले सरकार को शुल्क दें। ठाकुर ने ये भी कहा, “इसी तरह का शुल्क मुगल बादशाह औरंगजेब ने भी हिंदुओं के तीर्थ यात्रा पर लगाया था जिसे ‘तीर्थ यात्रा महशूल’ यानी ‘जजिया कर’ कहा जाता था. मुख्यमंत्री ने इंसानों ही नहीं बल्कि घोड़े और खच्चरों पर भी शुल्क लगा दिया है. जिससे श्रद्धालु से लेकर घोड़े चलाने वाले भी परेशान हैं। जयराम ठाकुर ने कहा, “सरकार का यह कदम बहुत दुर्भावनापूर्ण है. चूड़धार की यात्रा करने वाले श्रद्धालु भगवान शिरगुल महाराज के दर्शन करने लिए वहां जाते हैं. शिरगुल महाराज के प्रति हिमाचल समेत देश भर के श्रद्धालुओं में बड़ी आस्था है. शिरगुल महाराज शिमला, सोलन, सिरमौर के साथ-साथ उत्तराखंड के जौनसारबावर के लोगों के इष्ट देव हैं. इन क्षेत्रों के लोगों का तो वहाँ अक्सर आना-जाना रहता है. सभी का एक सांस्कृतिक जुड़ाव भी है।

हिमाचल में आज से सभी व्यावसायिक वाहनों में डस्टबिन अनिवार्य, उल्लंघन पर ₹10,000 जुर्माना

 Himachal Prdaesh News: हिमाचल प्रदेश में सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. 29 अप्रैल से राज्य में सभी व्यावसायिक वाहनों—जैसे बसें, टैक्सियां और टेंपो ट्रैवलर—में डस्टबिन रखना अनिवार्य कर दिया गया है. इस नियम का उल्लंघन करने पर 30 अप्रैल से ₹10,000 तक का जुर्माना लगाया जाएगा. पर्यटन सीजन में हिमाचल में हर साल 1.5 से 2 करोड़ पर्यटक आते हैं, जिनमें से कई लग्जरी बसों और टैक्सियों का इस्तेमाल करते हैं. अक्सर देखा गया है कि वाहन चालकों द्वारा कूड़ा सड़कों के किनारे फेंका जाता है. अब सरकार ने इस पर सख्ती करते हुए “हिमाचल प्रदेश नॉन-बायोडिग्रेडेबल गारबेज कंट्रोल एक्ट” के तहत दंड का प्रावधान किया है. एचआरटीसी (हिमाचल पथ परिवहन निगम) ने भी इस दिशा में कदम उठाते हुए अपनी बसों में डस्टबिन लगाना शुरू कर दिया है. बसों के दरवाजे के पास डस्टबिन लगाए जा रहे हैं, और चालकों व परिचालकों को यात्रियों को कूड़ा इधर-उधर न फेंकने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि बसों के डस्टबिन केवल बस अड्डों पर लगे बड़े कूड़ादानों में ही खाली किए जाएं. यदि कोई यात्री या चालक सड़क पर कूड़ा फेंकता है तो उस पर ₹1,500 का जुर्माना लगाया जाएगा। एचआरटीसी की 3180 बसों में यह व्यवस्था चरणबद्ध ढंग से लागू की जाएगी।

ट्रैफिक रूल तोड़ने वालों अब हो जाओ सावधान: चंडीगढ़ पुलिस ने तैयार करवाया ई-नाका सॉफ्टवेयर, कैसे काम करेगा?

चंडीगढ़: चंडीगढ़ में ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर अब निगरानी रखी जाएगी। इसके लिए चंडीगढ़ पुलिस ने ‘ई-नाका सॉफ्टवेयर’ तैयार किया है, जिससे जांच प्रक्रिया पारदर्शी और आसान हो जाएगी। यह मॉडर्न डिजिटल सिस्टम चंडीगढ़ पुलिस को हर गाड़ी और उसके चालक की पूरी जानकारी मात्र एक स्कैन पर उपलब्ध कराएगा। पुलिस जल्द ही इस सिस्टम को लॉन्च करने जा रही है। इस सॉफ्टवेयर में दो मुख्य एप शामिल किए गए हैं—ई-वाहन और ई-साथी। जैसे ही कोई वाहन नाके पर पहुंचेगा, पुलिसकर्मी उसकी नंबर प्लेट स्कैन करेगा और गाड़ी की पूरी डिटेल स्क्रीन पर आ जाएगी। यह जानकारी पूरी तरह से सेंट्रल डेटाबेस से लिंक होगी। अगर किसी की गाड़ी चोरी हुई है तो इस स्कैन में आते ही उसका पूरा रिकॉर्ड इसमें आ जाएगा जिससे पता चल जाएगा। इस सिस्टम की मदद से यह भी तुरंत पता चल जाएगा कि गाड़ी चोरी की है या नहीं, कितने चालान हुए हैं, कौन से चालान अभी लंबित हैं, ड्राइविंग लाइसेंस वैध है या नहीं, और गाड़ी का असली मालिक कौन है। अगर वाहन किसी और को बेचा जा चुका है, तो उसकी जानकारी भी सामने आ जाएगी। नियम तोड़ने पर वाहन चालक मौके पर ही चालान भुगत सकेगा। सॉफ्टवेयर में दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन करने पर चालान की राशि मोबाइल स्क्रीन पर आ जाएगी, जिसे तुरंत डिजिटल मोड से भुगतान किया जा सकता है। इससे नकद लेन-देन और रिश्वत जैसे मामलों पर भी अंकुश लगेगा। सॉफ्टवेयर में पुलिसकर्मी की इन-टाइम और आउट-टाइम एंट्री भी दर्ज होगी। यानी अब यह भी रिकॉर्ड रहेगा कि कौन पुलिसकर्मी कितने समय तक किस नाके पर ड्यूटी पर था। नाके पर तैनात कर्मियों को टैबलेट दिए जाएंगे, जिनमें कैमरा भी होगा। पुलिसकर्मी अपनी कार्रवाई की रिकॉर्डिंग भी कर सकेंगे, जिसे वरिष्ठ अधिकारी कभी भी देख सकेंगे।

आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र ने हिमाचल को दिए 107.15 करोड़

शिमला: केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया निधी(एनडीआरएफ) के तहत हिमाचल प्रदेश को 107.15 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता जारी की है। यह मदद वर्ष 2024 में आई प्राकृतिक आपदा बाढ़, बादल फटने व भूस्खलन से हुए नुकसान की भरपाई के लिए दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की संस्तुति के बाद आर्थिक सहायता हिमाचल के अलावा अन्य राज्यों को भी जारी हुई है।  केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसकी संस्तुति 11 अप्रैल को वित्त मंत्रालय को भेज दी थी। इस संबंध में मंत्रालय के उप सचिव गंधर्व वजूभाई पटेल ने हिमाचल सरकार के वित्त सचिव को पत्र जारी किया है। इस पत्र में स्पष्ट किया है कि भारतीय रिजर्व बैंक इस मदद को राज्य सरकार के खाते में डाले। केंद्र की ओर से इस मदद को जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि यह राशि एनडीआरएफ के तहत ही खर्च होगी। इसकी गाइडलाइंस 15वें वित्त आयोग के अनुसार जारी की गई है। इसमें निर्देश दिए गए हैं कि इस संबंध में एक्शन टेकन के बारे में मंत्रालय के संबंधित डिवीजन को सूचित किया जाए। इस आपदा राहत राशि को जारी करने की सूचना आवासीय आयुक्त हिमाचल सरकार नई दिल्ली को भी भेजी गई है। 

कारोबारी से ऑनलाइन ठगी, सरिए का ऑर्डर देकर गंवाए 11.35 लाख…

लाइव हिमाचल/शिमला: अब साइबर अपराधी गूगल सर्च इंजन के जरिये भी लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। ताजा मामला शिमला के रोहड़ू उपमंडल में सामने आया है, जहां कारोबारी जुब्बल निवासी गोविंद सिंह से 11.35 लाख रुपए की ठगी हुई। जानकारी के अनुसार गोविंद सिंह को अपने निजी निर्माण कार्य के लिए भारी मात्र में सरिए की आवश्यकता थी। 25 अप्रैल को उन्होंने गूगल पर टाटा स्टील कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर का नंबर तलाशा। इसी दौरान एक शातिर ठग ने खुद को टाटा स्टील का एरिया मैनेजर आलोक कुमार बताकर उनसे संपर्क किया। ठग ने गोविंद सिंह का विश्वास जीतते हुए 15 टन सरिए का ऑर्डर बुक कराया और एडवांस में 11,35,650 रुपये की ऑनलाइन भुगतान करवा ली। गोविंद सिंह को भरोसा था कि वह सीधे कंपनी से माल खरीद रहे हैं, लेकिन तय समय पर जब सरिया नहीं पहुंचा और ठग से भी संपर्क नहीं हो पाया, तो उन्हें ठगी का अहसास हुआ। उन्होंने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत रोहड़ू थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने आम जनता से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी कंपनी से ऑनलाइन खरीदारी करने से पहले उसकी आधिकारिक वेबसाइट या नजदीकी कार्यालय से पुष्टि अवश्य कर लें।

पुलिस की स्पैशल डिटैक्शन टीम ने 55.6 ग्राम चिट्टे के साथ पंजाब का तस्कर धरा

लाइव हिमाचल/बिलासपुर: बिलासपुर पुलिस द्वारा नशा तस्करों के खिलाफ छेड़े गए अभियान के तहत विभाग की स्पैशल डिटैक्शन टीम को बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने पंजाब राज्य के एक व्यक्ति को 55.6 ग्राम चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस की माने तो यह इस साल की पुलिस द्वारा पकड़ी गई सबसे बड़ी खेप है। पुलिस की टीम ने इस मामले में फिरोजपुर पंजाब के एक युवक को थापना टनल-2 स्वारघाट के पास गिरफ्तार किया है। आरोपित की पहचान अरमान (23) निवासी मकान नंबर 41 कुम्हार मंडी फिरोजपुर कैंट पंजाब के रूप में हुई है। मिली जानकारी के अनुसार यह युवक हिमाचल और पंजाब राज्य का मुख्य चिट्टा तस्कर है। बहरहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।