



लाइव हिमाचल/मंडी : मंडी के एक विशेष न्यायालय ने 8.256 किलो चरस रखने के चार दोषियों को 16-16 वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषियों पर 1.40-1.40 लाख रुपये जुर्माना लगाया है। जुर्माना न भरने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। चारों के विरुद्ध 13 जनवरी 2023 को पुलिस थाना सदर में मादक पदार्थ अधिनियम की धारा 20 और 29 के तहत मामला दर्ज हुआ था। सदर थाना के मुख्य आरक्षीभानु प्रताप ने कांस्टेबल पंकज कुमार और कॉन्स्टेबल शरण सिंह के साथ 13 जनवरी को भ्यूली चौक के पास वाहनों की जांच के लिए नाका लगाया हुआ था। पुलिस ने कुल्लू से मंडी की ओर आ रही एक निजी बस एचपी 65-4633 को रोका था। जांच के दौरान बस की आखिरी सीट पर बैठे एक व्यक्ति, रमेश चंद की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। उसके पैरों के पास चावल की बोरी रखी हुई थी। जब पुलिस ने बोरी खोली तो चरस के 10 पैकेट बरामद हुए, जिनका कुल वजन 8.256 किलोग्राम था। जिला न्यायवादी विनोद भारद्वाज ने इसकी पुष्टि की है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई थी कि चरस पांच लाख रुपये में खरीदी गई थी। पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया था। इसमें रमेश चंद गांव धार तहसील पद्धर, गोकल चंद निवासी बागी तहसील बालीचौकी, बलदेव गांव धरमेड़ और सुरेश कुमार निवासी दरगर तहसील पद्धर जिला मंडी शामिल थे। रमेश चंद को 13 जनवरी 2023 को गिरफ्तार किया गया था। गोकल चंद को छह फरवरी,बलदेव को नौ तथा सुरेश कुमार को 11 मार्च को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने जांच के दौरान आरोपितों के मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और उनकी लोकेशन को खंगाला।
सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि 12 जनवरी 2023 को यह सभी बालीचौकी के तीर्थन गांव में एक में ठहरे थे। होटल मालिक लक्ष्मी नारायण ने पुष्टि की थी कि सुरेश ने ठहरने के लिए 1,200 रुपये दिए थे। पुलिस ने बालीचौकी और पंडोह चौक के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। इनमें दिखा कि बलदेव और सुरेश एक ऑल्टो कार में कनिका बस को एस्कॉर्ट कर रहे थे। एक और फुटेज में गोकल चंद बोरी लेकर बस में चढ़ता दिखा था। राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट के अनुसार, बरामद पदार्थ चरस था, इसमें 33.45प्रतिशत चरस अर्क पाया गया था। विशेष न्यायालय ने चार आरोपितों को मादक पदार्थ अधिनियम की धारा 20 और 29 के तहत दोषी ठहराया था। न्यायालय ने कहा कि बरामद की गई चरस वाणिज्यिक मात्रा से अधिक है, इसलिए सख्त सजा अनिवार्य है। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि ड्रग्स का समाज पर विनाशकारी प्रभाव पड़ता है। दोषियों ने ड्रग्स की तस्करी और बिक्री में संगठित अपराध की योजना बनाई थी, इसलिए कोई नरमी नहीं बरती जा सकती।