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40 साल बाद हिमाचल में शुरू हो रहा भुंडा महायज्ञ,देवताओं के साथ देवलु पहुंचेंगे दलगांव…

लाइव हिमाचल/शिमला:हिमाचल प्रदेश के शिमला के रोहड़ू में एतिहासिक भुंडा महायज्ञ का आगाज गुरुवार को होने जा रहा है। महायज्ञ में संघेड़ा रस्म के साथ देवताओं का आगमन होगा। देवताओं के साथ हजारों देवलु हथियारों से लैस होकर भूंडे में पहुंचेंगे। इस भुंडा महायज्ञ का आयोजन 2 से 6 जनवरी तक चलेगा। शुक्रवार को सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू भी मुख्य अतिथि के तौर पर यज्ञ में शिरकत करेंगे। शिमला के रोहड़ू की स्पैल वैली के दलगांव में 40 साल बाद इस महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। इससे पहले, 1985 में यह भुंडा महायज्ञ हुआ था। बताया जा रहा है कि 1500 परिवार इस दौरान महायज्ञ में आने वाले लोगों की खातिरदारी करेंगे। अहम बात है कि यहां पर पूरे गांव में लोगों के लिए टेंट और रहने खाने पीने की व्यवस्था की गई है। ऐसे में 100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। क्योंकि चार दिन तक लोगों के घरों पर ही 5 लाख लोग शिरकत कर सकते हैं।हालांकि, पुलिस का अनुमान है कि इसमें एक से डेढ़ लाख लोग शामिल होंगे। गांव में लोगों के रहने खाने पीने का इंतजाम किया जाएगा। रोहड़ू की स्पैल वैली के भमनाला, करालश, खोड़सू, दयारमोली, बश्टाड़ी, गावणा, बठारा, कुटाड़ा, खशकंडी, दलगांव और भ्रेटली गांवों में 1500 के करीब परिवार मेजबान के रूप में नजर आएंगे। गुरुवार को यज्ञ के लिए पुलिस और प्रशासन ने एडवायजरी जारी की है। यज्ञ के आयोजन स्थल के लिए स्पेशल बसें चलाई गई हैं। यज्ञ के लिए रोहड़ू के आसपास के इलाकों में 2 हजार से अधिक तलवारों की भी बिक्री हुई है। वहीं, चंडीगढ़ और पंजाब से भी टैंट मंगाने पड़े हैं। भुंडा महायज्ञ की शुरूआत भगवान परशुराम ने की थी। कहा जाता है कि इस यज्ञ में परशुराम ने नरमुंडों की बलि दी थी। इसलिए इसे नरमेघ यज्ञ भी कहा जाता है। ये अनुष्ठान, पूर्ववर्ती बुशैहर रियासत के राजाओं की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।हिमाचल में कुल्लू के निरमंड, रामपुर बुशहर, रोहड़ू में इसे सदियों से मनाया जा रहा है।यहीं से लोग भुंडा महायज्ञ में शिरकत करेंगे। बीते तीन साल से महायज्ञ की तैयारियां चल रही हैं। महायज्ञ में सबसे रोचक चीच जो देखने को मिलेगी, वह शख्स सूरत राम की ओर से रस्सी पर ‘मौत की घाटी’ पार करना। वह 9वां बार इस तरह की कोशिश करेंगे, जिसमें दो पहाड़ियों के बीच विशेष प्रकार की घास की बनी रस्सी (बंधी मुंजी) पर के ऊपर से गुजरेंगे। सूरत राम कहते हैं कि वह भाग्यशाली हैं, जो उन्हें यह मौका मिला है।वह बताते  हैं कि इस रस्सी को नाग का प्रतीक माना जाता है और यह प्रदर्शन महायज्ञ का अहम हिस्सा माना जाता है।लोगों ने घरों में मेहमानों के लिए टेंट लगा दिए हैं। साथ ही अतिरिक्त कमरों का निर्माण भी किया गया है। माना जाता है कि महायज्ञ में क्षेत्र के तीन प्रमुख देवता बौद्रा महाराज, महेश्वर, और मोहरि शिरकत करेंगे. उनके साथ हजारों देवलु (अनुयायियों) आएंगे। वीहं, परशुराम के चार स्वरूप भी इस आयोजन में भाग लेंगे। बीते रविवार को भूँडा महायज्ञ आयोजन की तैयारियों का जायजा लेने डीसी अनुपम कश्यप और एसपी संजीव गांधी भी यहां पर मंदिर में पहुंचे थे।डीसी अनुपम कश्यप ने कहा कि इस  महायज्ञ में लाखों की तादाद में श्रद्धालुओं के होने की उम्मीद है। ऐसे के मंदिर कमेटी  की ओर से की जा रही व्यवस्थाओं के बारे में जायजा लिया। यहां पर महायज्ञ के दौरान पुलिस की ओर से विशेष ट्रैफिक व्यवस्था बनाई गई है। इसके साथ ही  स्वास्थ्य सुविधाएं, अग्निशमन दल की तैनाती आदि को लेकर रणनीति बनाई गई। पुलिस ने अनुमान लगाया है कि एक से डेढ़ लाख लोग यहां पर पहुंचेंगे।एसपी संजीव कुमार गांधी ने बताया कि दलगांव  की जियो मैपिंग की गई है और इसी के आधार पर ट्रैफिक व्यवस्था बनाई गई है। डीएसपी रोहड़ू और  स्थानीय एसएचओ के अनुसार मंदिर कमेटी के सुझावों के ध्यान में रखते हुए ट्रैफिक प्लान लागू किया जाएगा। एसडीएम रोहड़ू ने किसी भी तरह के हथियार को लेकर यहां पर चलने पर रोक लगा दी है।

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