लाइव हिमाचल/पालमपुर: पालमपुर स्थित चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पशुपालकों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरा शोध किया है। अक्सर गायों में बार-बार कृत्रिम गर्भाधान कराने के बावजूद गर्भधारण न होने की समस्या देखी जाती है, जिसका मुख्य कारण बच्चेदानी की अंदरूनी परत में छिपा संक्रमण हो सकता है। जर्सी नस्ल की संकर गायों पर किए गए इस अध्ययन में 43 गायों की जांच की गई, जिनमें से लगभग 77 फीसदी गायों में बच्चेदानी के अंदरूनी संक्रमण की पुष्टि हुई है। खास बात यह है कि इस संक्रमण के कोई स्पष्ट बाहरी लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन यह गायों की प्रजनन क्षमता को बुरी तरह प्रभावित करता है। शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने बैक्टीरिया की सटीक पहचान कर दवा के प्रति उसकी संवेदनशीलता के आधार पर इलाज किया। इस प्रभावी उपचार के बाद न केवल संक्रमण और बैक्टीरिया में भारी कमी आई, बल्कि प्रजनन से जुड़े जरूरी हार्मोन जैसे एस्ट्राडियोल, एलएच और प्रोजेस्टेरोन का स्तर भी सामान्य स्थिति में लौट आया। उपचार के बाद जब गायों का कृत्रिम गर्भाधान कराया गया, तो सफलता दर 75.8 फीसदी दर्ज की गई। विजेंद्र नेगी, पंकज सूद, अंकित आहूजा सहित वैज्ञानिकों की टीम द्वारा किया गया यह शोध अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘रिप्रोडक्शन इन डोमेस्टिक एनिमल्स’ में भी प्रकाशित हुआ है। विश्वविद्यालय का यह अध्ययन पशुपालकों के लिए बेहद मददगार साबित होगा, जिससे वे समय रहते छिपे हुए संक्रमण का उपचार कराकर मवेशियों की बांझपन की समस्या से निजात पा सकेंगे।





