Home » Uncategorized » कैरी बैग उपलब्ध करवाना मार्ट की जिम्मेदारी, उपभोक्ता आयोग शिमला ने सुनाया फैसला; पैसे वसूलने पर लगाया जुर्माना

कैरी बैग उपलब्ध करवाना मार्ट की जिम्मेदारी, उपभोक्ता आयोग शिमला ने सुनाया फैसला; पैसे वसूलने पर लगाया जुर्माना

शिमला: जिला उपभोक्ता आयोग शिमला ने छोटा शिमला स्थित विशाल मेगा मार्ट को उपभोक्ताओं से कैरी बैग के लिए अतिरिक्त शुल्क वसूलने का दोषी पाया है। आयोग ने इसे अनुचित व्यापार करार देते हुए मार्ट को कैरी बैग के लिए गए 15 रुपये वापस करने के आदेश दिए हैं। साथ ही आयोग ने मानसिक उत्पीड़न और कानूनी खर्च के रूप में 5 हजार की एकमुश्त राशि का भुगतान करने को कहा है। मार्ट को अदालत के यह आदेश 45 दिनों के भीतर लागू करने होंगे।

आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि वस्तु विक्रय अधिनियम 1930 की धारा 36(5) के अनुसार सामान को डिलिवरेबल स्टेट (ले जाने योग्य स्थिति) में देना विक्रेता की जिम्मेदारी है। आयोग ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति रेहड़ी-फड़ी वाले से भी सामान खरीदता है, तो वह भी उसे कागज या लिफाफे में लपेटकर देता है। यह बेहद हैरान करने वाला है कि इतने बड़े मेगा मार्ट ग्राहकों को सामान हाथ में ले जाने पर मजबूर करते हैं या उनसे बैग के पैसे वसूलते हैं। शिकायतकर्ता शंकर शर्मा और नरेंद्र मेहता ने 31 अक्तूबर 2025 को छोटा शिमला स्थित मेगा मार्ट से घरेलू सामान खरीदा था। सामान का कुल मूल्य 597 था, लेकिन बिल में 15 अतिरिक्त कैरी बैग के लिए जोड़े गए थे। जब उपभोक्ताओं ने इसका विरोध किया, तो स्टोर मैनेजर ने कथित तौर पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया और कहा कि मार्ट मुफ्त बैग उपलब्ध नहीं कराता है। इसके बाद उपभोक्ताओं ने न्याय के लिए आयोग का दरवाजा खटखटाया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Gallery not found12
[democracy id="1"]
[adsforwp id="47"]