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फोर्टिस मोहाली ने मिनिमली-इनवेसिव सर्जरी के माध्यम से टखने और पैर की चोटों का सफल इलाज…

सोलन : फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के अंतर्गत फुट एंड एंकल विभाग उन्नत मिनिमली-इनवेसिव सर्जरी (एमआईएस) तकनीकों का उपयोग करते हुए जटिल पैर और टखने (फुट एंड एंकल) की विकृतियों के उपचार में नए मानक स्थापित कर रहा है। फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली में फुट एंड एंकल सर्जरी के कंसल्टेंट डॉ. चंदन नारंग ने पोस्ट-ट्रॉमैटिक विकृतियों, न्यूरोलॉजिकल फुट डिफॉर्मिटीज़, स्ट्रोक के बाद होने वाला फुट ड्रॉप, लंबे समय से उपेक्षित फ्रैक्चर तथा खेलों से संबंधित लिगामेंट चोटों सहित कई चुनौतीपूर्ण मामलों का सफलतापूर्वक उपचार किया है। उन्होंने न्यूनतम निशान छोड़ने वाली पोक-होल एमआईएस तकनीकों के माध्यम से तेज़ रिकवरी और जल्दी चलने-फिरने की सुविधा सुनिश्चित की है। ऐसे ही एक जटिल मामले में 35 वर्षीय मरीज जो सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए थे, गंभीर रूप से विकृत पैर और टखने के साथ फोर्टिस पहुंचे। मरीज की पहले कई सर्जरी हो चुकी थीं और त्वचा की खराब स्थिति, नसों व रक्त वाहिकाओं को हुए नुकसान के कारण उसे चलने में असमर्थता थी, जिसके चलते कहीं उन्हें अंग काटने (एम्प्यूटेशन) की सलाह दी गई थी। विस्तृत मेडिकल जांच के बाद डॉ. नारंग ने एडवांस्ड मिनिमली-इनवेसिव पोक-होल तकनीक से बिना बड़े चीरे लगाए विकृति को ठीक किया, जिससे नाज़ुक त्वचा, नसों और रक्त वाहिकाओं की सुरक्षा संभव हो सकी। इस उपचार से अंग को बचा लिया गया, सही एलाइनमेंट बहाल हुई और मरीज दोबारा चलने में सक्षम हो सका, जिससे एम्प्यूटेशन से बचाव हुआ। मामले पर चर्चा करते हुए डॉ. नारंग ने बताया कि विभाग ने स्ट्रोक, नसों की चोट और न्यूरो-मस्कुलर विकारों जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से ग्रसित मरीजों का भी उपचार किया है, जिनमें समय के साथ पैर की विकृतियां, असामान्य चाल और फुट ड्रॉप (पैर उठाने में असमर्थता) विकसित हो जाती है। फुट और एंकल सर्जरी पर प्रकाश डालते हुए डॉ. नारंग ने आगे कहा कि फुट और एंकल की विकृतियां चोट, न्यूरोलॉजिकल स्थितियों, स्ट्रोक या लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के कारण हो सकती हैं। ऐसे मामलों में पारंपरिक ओपन सर्जरी में जोखिम अधिक होता है, विशेषकर तब जब त्वचा, नसें या रक्त आपूर्ति प्रभावित हों। मिनिमली-इनवेसिव सर्जरी हमें कम चोट के साथ विकृतियों को ठीक करने, संतुलन बहाल करने और मरीजों को फिर से चलने में मदद करने का अवसर देती है। हमारा मुख्य लक्ष्य अंग को बचाना, कार्यक्षमता की बहाली और कम से कम निशान के साथ जल्दी सक्रियता सुनिश्चित करना है।

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