शिमला: पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा कि लोकतंत्र में सभी संस्थाओं के अधिकार और कर्तव्य निष्चित है। राज्यपाल प्रदेश में केन्द्र का एजेंट नहीं होता। राज्यपाल न प्रदेश सरकार का होता है और न केन्द्र सरकार का होता है। राज्यपाल एक संवैधानिक पद है। उन्होंने कहा कि बजट अधिवेशन प्रारम्भ होने से पहले राज्यपाल का अभिभाषण होता है परन्तु उस अभिभाषण को राज्य सरकार तैयार करती है और पढ़ने का दायित्व राज्यपाल का होता है। शांता कुमार ने कहा कि राज्य सरकार को भाषण तैयार करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि उसमें कोई ऐसी बात न लिखी जाए जिसे संवैधानिक दायित्व के कारण राज्यपाल पढ़ने से इन्कार कर दे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपने अधिकारों और कर्तव्य के बारे में बहुत सजग रहना चाहिए। ऐसी स्थिति न आये कि बजट अधिवेशन के पहले दिन विधानसभा भी हो- सरकार भी हो – राज्यपाल भी हो राज्यपाल अभिभाषण हो लेकिन फिर भी राज्यपाल का भाषण न हो, अच्छी परम्परा नही है। शांता कुमार ने कहा कि यह स्थिति लोकतंत्र की दृष्टि से अच्छी नही है कि राज्यपाल अभिभाषण पूरा न पढ़े लेकिन इसकी जिम्मेदारी सरकार पर आती है।





