
शिमला : 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर आयोजित समारोह में हिमाचल प्रदेश उद्योग विभाग की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इस झांकी ने प्रदेश की औद्योगिक प्रगति, सांस्कृतिक विरासत और नवाचार की दिशा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। झांकी का मुख्य विषय हिम एमएसएमई उत्सव 2026 रहा, जिसने प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को नई पहचान दिलाई है। झांकी में 4023 हस्तनिर्मित हैंडलूम शॉलों का भव्य प्रदर्शन किया गया, जिसने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान बनाकर हिमाचल के बुनकरों और कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरव दिलाया। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने झांकी को आत्मनिर्भर हिमाचल की दिशा में एक मजबूत कदम बताते हुए कहा कि हस्तशिल्प, नवाचार और उद्यमिता का यह संगम प्रदेश की औद्योगिक सशक्तिकरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की योजनाएं अब केवल कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि धरातल पर प्रभावी परिणाम दे रही हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) आर.डी. नजीम ने कहा कि यह झांकी पारंपरिक कौशल और आधुनिक तकनीक के सफल समन्वय को दर्शाती है, जिससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है। आयुक्त उद्योग डॉ. यूनुस ने कहा कि हिम एमएसएमई उत्सव ने प्रदेश के उद्यमियों को एक मजबूत मंच प्रदान किया है, जिससे उनके उत्पाद और विचार नई ऊंचाइयों तक पहुंच रहे हैं। झांकी में स्टार्टअप, महिला उद्यमिता, एक जिला एक उत्पाद योजना, सीईओ मीट और नवाचार आधारित पहलें भी प्रदर्शित की गई, जो हिमाचल को निवेश और औद्योगिक विकास का उभरता केंद्र दर्शाती हैं। अतिरिक्त निदेशक उद्योग तिलक राज शर्मा ने कहा कि इन पहलों से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और भविष्य में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। कुल मिलाकर, यह झांकी केवल एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक आत्मविश्वास, रचनात्मकता और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक बनी।





