
हमीरपुर : दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने तथा दूध की खरीद एवं एकत्रीकरण के लिए एक सुनियोजित चेन विकसित करने के लिए प्रदेश सरकार ने जिला हमीरपुर में भी हर पंचायत में कम से कम एक दुग्ध सहकारी सभा बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने बुधवार को पशुपालन विभाग, सहकारिता विभाग, मिल्क फैडरेशन और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक करके मिल्क सोसाइटियों के गठन की प्रगति की समीक्षा की।
उन्होंने कहा कि जिला में अभी तक 42 मिल्क सोसाइटियों का गठन कर लिया गया है और सहकारिता विभाग ने इनमें से अधिकांश सोसाइटियों का ऑनलाइन पंजीकरण भी कर लिया है। उपायुक्त ने पशुपालन विभाग और मिल्क फैडरेशन के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे सोसाइटियों के गठन के साथ-साथ संबंधित क्षेत्रों में दूध के उत्पादन की क्षमता का भी आकलन करें और अधिक उत्पादन की संभावनाओं वाले क्षेत्रों में दूध के एकत्रीकरण एवं परिवहन के लिए सभी आवश्यक प्रबंध करें, ताकि इन सोसाइटियों को कार्यशील बनाया जा सके। पशुपालकों से एकत्रित दूध को जलाड़ी के चिलिंग प्लांट में या जिला कांगड़ा के ढगवार के प्लांट में भेजने के लिए अगर अतिरिक्त प्रबंधों की आवश्यकता है तो इनके बारे में भी तुरंत अवगत करवाएं। सोसाइटियों को टैस्टिंग किट्स प्रदान करने, चिलिंग प्लांट में अतिरिक्त मशीनरी और वाहनों इत्यादि की व्यवस्था के बारे में विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत करवाएं। इनके लिए स्थानीय स्तर पर भी संसाधन जुटाने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से घोषित किए दूध के दाम और दूध के एकत्रीकरण की प्रक्रिया के बारे में पशुपालकों को जागरुक करना भी बहुत जरूरी है। उपायुक्त ने सहकारिता विभाग के अधिकारियों से कहा कि नई सोसाइटियों का गठन होते ही उनका तुरंत ऑनलाइन पंजीकरण सुनिश्चित करें। इस बैठक में पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. सतीश कपूर ने दुग्ध सहकारी सभाओं के गठन की ताजा स्थिति की जानकारी दी।
सड़कों पर भटक रहे बेसहारा पशुओं को गौसदनों तक पहुंचाएं
उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने एक अन्य बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला में बेसहारा पशुओं की समस्या के बारे में विभागीय अधिकारियों के साथ व्यापक चर्चा की। उन्होंने कहा कि नेशनल हाईवे पर भटक रहे बेसहारा पशुओं को तुरंत हटाने के लिए उच्चतम न्यायालय ने विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिला हमीरपुर में भी इन दिशा-निर्देशों की अक्षरशः अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए पशुपालन विभाग, लोक निर्माण विभाग, नेशनल हाईवे अथॉरिटी, परिवहन विभाग, शहरी निकाय और पंचायतीराज संस्थाएं अपने-अपने क्षेत्रों में आवश्यक कदम उठाएं। अगर कहीं पर बेसहारा पशु मिलता है तो उसे तुरंत नजदीकी गौसदन या गौ सेंक्चुरी में भेजने की व्यवस्था करें। उपायुक्त ने बताया कि इस समय जिला में कुल 28 गौसदन एवं गौ सेंक्चुरी संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें लगभग 2293 पशुओं को रखने की क्षमता है। अभी इनमें लगभग 2286 पशु हैं। इनमें और पशुओं को रखने के लिए अतिरिक्त प्रबंध किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि बेसहारा पशुओं की समस्या के समाधान के लिए उपमंडल स्तर पर भी समितियों का गठन किया जाएगा। इस बैठक में पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. सतीश कपूर ने बताया कि जिला में हाईवे पर बेसहारा पशुओं के संभावित स्थानों को चिह्नित किया गया है और इन स्थानों से पशुओं को हटाकर गौसदनों में पहुंचाया जा रहा है। इस अवसर पर नगर निगम हमीरपुर के आयुक्त राकेश शर्मा, जिला पंचायत अधिकारी बबीता गुलेरिया और अन्य अधिकारियों ने भी महत्वपूर्ण सुझाव रखें।





