
लाइव हिमाचल/शिमला: पंचायतीराज चुनाव को टालने को लेकर मुख्यसचिव ने आदेश जारी कर दिए हैं. अधिसूचना में प्रदेश में प्रॉपर कनेक्टिविटी के बाद ही चुनाव संभव होने की बात कही गई है. अधिसूचना में कहा गया है. इस बार आपदा में प्रदेश को भारी नुकसान हुआ है. क्नेक्टिविटी बाधित हुई है. सड़कों की हालत खराब है. कई जिलों के डीसी ने इस बारे में पंचायत राज सचिव को पत्र भी लिखा है. अधिसूचना में बताया गया है कि हालात और कनेक्टिविटी बेहतर होने के बाद ही चुनाव संभव हैं, ताकि आम जनता एवं मतदान कर्मियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो तथा कोई भी मतदाता सड़क संपर्क की समस्या के कारण अपने मतदान के अधिकार से वंचित न हो हिमाचल प्रदेश सरकार ने मॉनसून 2025 के कारण हुए भारी नुकसान और खराब सड़कों को देखते हुए पंचायती राज संस्थाओं के दिसंबर में होने वाले चुनावों को स्थगित करने का फैसला किया है. मुख्य सचिव और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष संजय गुप्ता ने डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 की धारा 24(e) के तहत ये आदेश जारी किया. भाजपा के प्रदेश वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक जमवाल ने कहा कि प्रदेश में पंचायतीराज चुनावों को लेकर सियासी माहौल गरम है। कई जिलों के उपायुक्तों ने सचिव पंचायतीराज को पत्र लिखकर चुनाव स्थगित करने की सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि इन पत्रों में आपदा के कारण हुई जन-धन, सड़कों और अन्य सरकारी संपत्तियों की क्षति का हवाला दिया गया है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असली वजह सरकार की अलोकप्रियता और चुनाव में संभावित हार की आशंका है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को भली-भांति पता है कि यदि चुनाव समय पर हुए, तो जनता उन्हें करारी शिकस्त दे सकती है। राजनीतिक जानकार इसे जनभावनाओं के खिलाफ उठाया गया कदम और तानाशाही की प्रवृत्ति मान रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरह की राजनीति जनता की भावनाओं से खिलवाड़ करने वाली है और लंबे समय तक नहीं चल सकती। पंचायत चुनाव टालने की सिफारिश का इसी तरह का एक पत्र डीसी हमीरपुर के नाम से सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। वहीं, प्रदेश के पूर्व पंचायतीराज मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता वीरेंद्र कंवर ने बंगाणा में मीडिया से रूबरू होते हुए बड़ा दावा किया कि इस वर्ष दिसंबर में प्रस्तावित पंचायत चुनाव अब नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सरकार पंचायतीराज चुनावों में संभावित हार के डर से चुनावों को एक वर्ष तक टालने की तैयारी में है। वीरेंद्र कंवर ने कहा कि परंपरागत रूप से हर चुनावी वर्ष में 25 सितंबर तक पंचायतों का रोस्टर जारी हो जाता था, लेकिन इस बार आधा अक्तूबर बीतने के बावजूद न तो रोस्टर जारी हुआ है और न ही चुनावी लिस्ट सरकार के दफ्तरों तक पहुंची है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अभी तक चुनावी प्रक्रिया की शुरुआत ही नहीं हुई, तो दिसंबर में चुनाव कराना संभव ही नहीं है। पूर्व मंत्री ने कहा कि पंचायती राज विभाग और राज्य चुनाव आयोग दोनों ही इस बार असमंजस में हैं, क्योंकि सरकार की ओर से कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिए गए हैं। कंवर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार जानबूझकर आपदा का बहाना बना रही है, जबकि पंचायत चुनाव आयोजित करने के लिए राज्य की स्थिति पूरी तरह सामान्य है। कंवर ने कहा कि सुक्खू सरकार जनता के मूड को अच्छी तरह समझ चुकी है। सरकार पहले लगातार पंचायती राज चुनावों को लेकर यही कहती आ रही थी कि ये चुनाव समय पर होंगे. सीएम सुक्खू ने भी मानसून सत्र के दौरान यही कहा था कि सरकार की पंचायती राज चुनाव टालने की कोई योजना नहीं है. पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने भी कुछ दिन पहले यही कहा था कि उनकी चुनाव टालने की कोई योजना नहीं है। पंचायत चुनाव रद्द होने पर बीजेपी सरकार पर भड़क गई है. पूर्व मुख्यमंत्री को नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने दिसंबर में होने वाले पंचायत चुनाव रद्द करने पर कहा कि मुख्यमंत्री और सरकार प्रदेश के लोगों का सामना नहीं कर सकती, इसलिए आपदा की आड़ में पंचायत चुनाव नहीं करवा रही है. सरकार को इस चुनाव के परिणाम पहले से ही पता है. इन चुनावों में कांग्रेस की करारी हार तय है, इसलिए पहले नगर निगम और नगर निकाय के चुनाव से किनारा किया और अब पंचायत चुनाव को भी रोक दिया है। प्रदेश में इस बार 3577 पंचायतों में जनता अपने मुखिया का चयन करेगी. इसके अलावा प्रदेश में 91 पंचायत समितियों सहित 249 जिला परिषद वार्डों में सदस्यों के चुनने के लिए चुनाव होने हैं. वहीं, संविधान के प्रावधानों के अनुसार अनुसूचित जातियों, अनूसूचित जनजातियों और महिलाओं के लिए तीनों स्तरों पर पंचतीराज संस्थाओं के सदस्यों और अध्यक्ष के पदों पर आरक्षण दिया जा रहा है. इसी तरह से ग्राम पंचायतों में प्रधान, वार्ड सदस्यों, पंचायत समितियों और जिला परिषद के सदस्यों के लिए चुनाव लड़ने के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है. प्रदेश में केवल उपप्रधान का ऐसा पद है, जो अनारक्षित है. इस पद के किसी भी वर्ग का व्यक्ति चुनाव चुनाव लड़ने को अपना नामांकन दाखिल कर सकता है।





