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बघाट बैंक प्रबंधन ने आरबीआई से राहत देने के लिए लिखा पत्र…

. बैंक अध्यक्ष अरुण शर्मा ने कहा, लोगों का पैसा सुरक्षित

लाइव हिमाचल/अशोक वर्धन/सोलन: आरबीआई की ओर से द बघाट अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक पर 6 माह तक लेनदेन पर लगाए गए प्रतिबंध के बाद डिफाल्टरों पर कार्रवाई तय है। बघाट बैंक की 137.50 करोड़ के नॉन परफॉर्मिंग ऐसेट (एनपीए) में करीब 15 ऐसे बड़े डिफाल्टर हैं जिनके पास करीब 50 करोड़ रुपए फंसे हैं। जानकारी के मुताबिक कुल बैंक एनपीए में 499 ऋण लेने वाले डिफाल्टर हैं। आरबीआई ने बैंक पर प्रतिबंध इसलिए लगाया है ताकि वह अपना पूरा फोकस सिर्फ रिकवरी पर लगाए। आरबीआई ने निर्देश दिए हैं कि उपभोक्ता बैंक से 6 माह की कैपिंग के दौरान सिर्फ 10 हजार तक की निकासी ही कर सकते हैं। साथ ही डिपॉजिट पर भी रोक लगाई गई है। बघाट बैंक पर लगी कैपिंग के बाद बैंक प्रबंधन ने अपने कस्टमर्स को राहत दिलाने के लिए वीरवार को आरबीआई को एक पत्र लिखा है। जिसमें कई बिंदुओं पर लेनदेन में राहत देने की मांग की गई है। वहीं बैंक प्रबंधन की ओर से लिखे गए पत्र में आरबीआई से कहा गया है कि बैंक के परफॉर्मिंग ऐसेट का लेनदेन पहले की तरह चलने दिया जाए क्योंकि इनका एनपीए से कोई लेनादेना नहीं है। लेनदेन न होने से यह लोग भी डिफाल्टर हो सकते हैं और उनके बिजनेस पर भी असर पड़ेगा। एफडीआर, मिनी डिपॉजिटर्स और आरडी के कस्टमर पर भी यह प्रतिबंध नहीं लगाए जाने चाहिए।

इमरजेंसी में प्रतिबंध न लगे
पत्र में सबसे बड़ी बात यह कही गई है कि बैंक के कस्टमर को अति जरूरत के समय में लेनदेन करने की इजाजत मिलनी चाहिए। यानी परिवार में मौत, शादी या मेडिकल इमरजेंसी के समय इस प्रतिबंध से छूट मिलनी चाहिए।

लोगों को पैनिक होने की जरूरत नहीं उनका पैसा सुरक्षित: चेयरमैन
बैंक के अध्यक्ष अरुण शर्मा ने कहा कि यह बैंक 1970 से चल रहा है। ऐसे समय में पैनिक होने की जरूरत नहीं है उपभोक्ताओं का पैसा बैंक में पूरी तरह से सुरक्षित है। बैंक के पास 250 करोड रुपए के लिक्विड ऐसेट हैं। 2022 में बैंक का एनपीए 322 करोड़ रुपए था जो अब 138 करोड रुपए के आसपास रह गया है। करीब 40 करोड़ रुपए के मामले आर्बिट्रेशन में लगे हुए हैं जो अंतिम स्टेज में हैं। कस्टमर को रहात देने के लिए आरबीआई को पत्र लिखा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही कस्टमर्स को कुछ राहत मिलेगी। नोटबंदी के समय भी इमरजेंसी के मामलों में राहत मिली थी।

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