नेशनल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को एक खास समारोह में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के महत्व को बताया और इन्हें “आत्मनिर्भर भारत की कार्यशालाएं” करार दिया। पीएम मोदी ने कहा कि आज का भारत कौशल को प्राथमिकता देता है। वह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में कौशल दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर 62,000 करोड़ रुपये से अधिक की युवा केंद्रित नई योजनाओं का शुभारंभ भी किया। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य बिहार में महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाना है।उन्होंने बताया कि 2014 तक भारत में सिर्फ 10,000 आईटीआई थे, लेकिन पिछले 10 वर्षों में 5,000 और नए आईटीआई स्थापित किए गए हैं। यह संख्या अब बढ़कर 15,000 हो गई है। उनका कहना था कि आईटीआई अब सिर्फ औद्योगिक शिक्षा के संस्थान नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की निर्माण कार्यशालाएँ बन चुकी हैं। पीएम मोदी ने कहा, ”आज का समारोह इस बात का प्रतीक है कि आज का भारत कौशल को कितनी प्राथमिकता देता है। आज देशभर के नौजवानों को लिए शिक्षा और कौशल विकास की दो और बड़ी योजनाएं लांच हुई हैं। इस convocation के पीछे का विचार यही था कि जब तक हम श्रम को प्रतिष्ठा नहीं देंगे, हुनर के लिए जो लोग काम करते हैं, जिनमें सामर्थ्य है, उनका सार्वजनिक जीवन में सम्मान नहीं होगा तो शायद वो अपने आप को कम महसूस करेगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत को अपनी “स्थानीय प्रतिभा, कौशल और ज्ञान” को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, ताकि देश 21वीं सदी में आत्मनिर्भर बन सके। उन्होंने उदाहरण के रूप में कहा कि बिहार के युवाओं के सशक्तिकरण के लिए यह योजनाएँ महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 11 वर्षों में 1.5 करोड़ से अधिक युवाओं को आईटीआई में प्रशिक्षित किया गया और उन्हें उनकी स्थानीय भाषाओं में कौशल सिखाया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने आईटीआई के 46 अखिल भारतीय टॉपरों को सम्मानित किया और कहा कि सार्वजनिक जीवन में कुशल श्रमिकों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने “श्रम एव जयते” (श्रम विजयी होता है और श्रम का सम्मान होता है) का उद्धारण देते हुए कहा कि कौशल को प्रतिष्ठा देने से समाज में एक सकारात्मक बदलाव आएगा।





