



शिमला: पुरानी पेंशन स्कीम (ओपीएस) पर कैग ने टिप्पणी की है कि आने वाले वित्तीय बोझ को ध्यान में रखा जाना चाहिए। हिमाचल प्रदेश में अप्रतिबद्ध व्यय के तहत सब्सिडी वर्ष 2019-20 के 1,067.78 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 1,768.35 करोड़ रुपये हो गई। वर्ष 2019-24 के दौरान अप्रतिबद्ध राजस्व व्यय में इसका भाग 9.16 प्रतिशत से 13.64 प्रतिशत तक रहा। इस अवधि में कुल उपदान में बिजली सब्सिडी का 35 प्रतिशत से 53 प्रतिशत तक उल्लेखनीय भाग रहा। वर्ष 2023-24 में राज्य सरकार ने 731.09 करोड़ रुपये के उधार पर गारंटी दी। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की ओर से सदन के पटल पर कैग का वर्ष 2023-24 का वित्तीय प्रतिवेदन रखा। कैग रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार ने एक अप्रैल 2023 से पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को अधिसूचित कर वापस बहाल कर दिया। राज्य की ऋण धारणीयता का आकलन करते समय आगामी वर्षों में पुरानी पेंशन योजना के लागू होने से आने वाले वित्तीय बोझ को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
कैग ने कहा कि पुरानी पेंशन योजना की बहाली के कारण राज्य के खजाने पर पड़ने वाले प्रत्याशित वित्तीय प्रभाव एवं राजकोषीय बोझ देयता के निपटाना के लिए कोई पृथक पेंशन निधि नहीं बनाई गई है। इसकी पूर्ति राज्य के अपने संसाधनों से की जाएगी और भारत सरकार और पीएफआरडीए के पास रखे अंश का उपयोग भी भविष्य की पेंशन देयताओं की आंशिक पूर्ति के लिए किया जाएगा। कैग के अनुसार 31 मार्च 2023 तक 49.56 लाख रुपये से जुड़े गबन, हानि, चोरी आदि के 30 मामले पाए गए। वर्ष 2023-24 के दौरान इनमें से लोक निर्माण विभाग से संबंधित 11.17 लाख रुपये राशि के 15 मामलों का समायोजन व निपटान किया गया। वर्ष के दौरान कोई भी नया मामला दर्ज नहीं किया गया। हालांकि 31 मार्च 2024 तक 38.39 लाख से अंतर्गत 15 मामले अभी भी लंबित रहे। इनका समय पर निपटारा नहीं हुआ। प्रदेश वित्तीय नियम 2009 के तहत संबंधित अथारिटी चल व अचल संपत्ति जैसा भी मामला हो, उसकी हानि के कारण की विस्तृत जांच करेगी। विस्तृत जांच पूरी होने के बाद उसकी विस्तृत रिपोर्ट यथोचित माध्यम से सरकार को उचित कार्रवाई के लिए भेजेगी। इसकी एक प्रति महालेखाकार को प्रेषित की जाएगी। यदि सरकारी कर्मचारी की उपेक्षा, धोखाधड़ी अथवा शरारत के कारण कोई सामग्री खराब हो जाती है तो उसकी जवाबदेही तय की जाएगी। कैग के अनुसार दुर्विनियोजन, हानि, चोरी आदि के कुल 15 मामलों में से 80 प्रतिशत मामले सरकारी सामग्री के दुरुपयोग व हानि से संबंधित हैं एवं शेष 20 प्रतिशत चोरी के मामले थे। इन 15 मामलों में से 40 प्रतिशत यानी छह मामले विभाग की ओर से अंतिम रूप देने कार्रवाई करने एवं आपराधिक जांच में विलंब के कारण लंबित थे। आगे यह पाया गया कि सभी 15 मामले पांच वर्ष से अधिक पुराने थे, जिनमें से सात ऐसे मामले भी शामिल थे, जो 15 साल से अधिक पुराने थे।