मंडी : मंडी शहर का पहला पुल ब्रिटिश राज के दौरान बना था. यह कहानी 1877 से पहले की है, जब मंडी रियासत के राजा विजय सेन थे. उस समय देश पर अंग्रेजों की हुकूमत थी और जॉर्ज पंचम ने दिल्ली में एक समारोह आयोजित किया. इसमें देश भर की रियासतों के राजाओं को बुलाया गया. मंडी रियासत के राजा विजय सेन भी इस समारोह में शामिल होने के लिए दिल्ली गए. समारोह के दौरान, जॉर्ज पंचम ने एक प्रतियोगिता आयोजित की, जिसमें घोड़ों और कार के बीच रेस लगवाई गई. मंडी के राजा विजय सेन के घोड़े ने कार को हराते हुए जीत हासिल की. इसके बाद, जॉर्ज पंचम ने शर्त के अनुसार राजा विजय सेन को एक कार ईनाम में दी. हालांकि, कार को मंडी लाना संभव नहीं था और अगर लाते भी, तो उस समय सड़कों और पुलों की व्यवस्था नहीं थी. इसलिए, राजा विजय सेन ने ब्रिटिश हकूमत से मंडी शहर को जोड़ने के लिए एक पुल बनाने का आग्रह किया, जिसे स्वीकार कर लिया गया और इस पुल का निर्माण कराया गया।
सीमेंट नहीं, मां की दाल से बना यह पुल
उस दौर में सीमेंट का उपयोग नहीं होता था. हिमाचल प्रदेश में लोग घरों और इमारतों के निर्माण के लिए मां की दाल का उपयोग करते थे. पुराने लोग दावा करते हैं कि मां की दाल से बनी इमारतें लंबे समय तक टिकाऊ रहती हैं, जो हिमाचल प्रदेश और भारत की प्राचीन संस्कृति और निर्माण विधियों का परिचायक है. काफी पुराना होने के कारण, विक्टोरिया पुल अब केवल पैदल यात्रियों के लिए उपयोग किया जाता है. पुल की पुरानी स्थिति और वाहनों के भार को सहन न कर पाने की संभावनाओं को देखते हुए, मंडी जिला प्रशासन ने इसे केवल पैदल यातायात के लिए ही अनुमत कर दिया है।





