



नाहन : कर्मचारी का बेटा हूं। सत्ता सुख को नहीं आए। हिमाचल के हक मांग कर सीधा दिल्ली से आया हूं। तिनका-तिनका जोड़कर बनता है घर। नेता प्रतिपक्ष से पूछना…कहां थे वो। शीघ्र शुरू होगा रेणुका बांध का कार्य। जयराम सरकार को हमीरपुर आयोग के कारनामों का था पता। 12 घंटे में हाटी समुदाय को एसटी का दर्जा। 20 हजार नौकरियों की प्रक्रिया शुरू। हिमाचल को बनाना है आत्मनिर्भर। आपदा राहत राशि व एनपीए फंड नहीं दे रही केंद्र सरकार। नहीं मिला विद्युत परियोजनाओं में हक तो सरकार कर लेगी अधिग्रहण। रात 2-2 बजे तक होती थी बैठकें। नहीं चाहते थे, विधानसभा का सत्र फिर भी बुलाया। शहर के ऐतिहासिक चौगान मैदान में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के संबोधन में ये मुख्य बिन्दु थे। मुख्यमंत्री ने कहा, वो चाहते तो ओपीएस को चार साल बाद भी लागू कर सकते थे। लेकिन ऐसा नहीं किया। वो भी एक कर्मचारी के बेटे हैं, जानते हैं कि पैंशन के मायने क्या होते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम लंबी-लंबी लग्जरी गाड़ियों में घूमने के लिए सत्ता में नहीं आए हैं। प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाना है। सत्ता सुख के लिए नहीं आए हैं। राज्य की जनता को धोखा नहीं देंगे। प्रदेश को पांव पर खड़ा करके दिखाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के लिए आए हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता को खो चुके बच्चों के प्रति गहरा लगाव है। ऐसे बच्चों के जीवन को संवारने के लिए सत्ता संभालते ही अहम फैसले लिए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वो केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात में हिमाचल के हक मांगकर सीधे दिल्ली से आ रहे हैं। उनका कहना था कि आपदा की राहत राशि राज्य का अधिकार है। तकरीबन 9,907 करोड़ रुपए जारी करने की मांग केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष रखी है। इसके अलावा एनपीए की भी 9 हजार करोड़ की राशि जारी नहीं की जा रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी नेता प्रतिपक्ष या भाजपा नेता मिलें तो उनसे एक सवाल पूछना, क्या वो आपदा की राहत राशि के लिए दिल्ली गए हैं, ताकि केंद्र सरकार ये राशि जारी कर सके। सीएम ने कहा कि आपदा के दौरान वो नहीं चाहते थे कि विधानसभा का सत्र बुलाया जाए। क्योंकि इससे पुलिस का ध्यान विधानसभा की सुरक्षा पर चला जाता, साथ ही व्यापारी सवालों के जवाब बनाने में लग जाते। ऐसे में आपदा पीड़ितों को राहत कैसे पहुंचती। बावजूद इसके विधानसभा का सत्र बुलाया गया। तीन दिन तक बहस भी हुई, लेकिन प्रस्ताव पर भाजपा ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वो केंद्र से मदद मांगते-मांगते हार गए, तब ये निर्णय लिया कि संवेदनशील राज्य सरकार अपने ही स्तर पर आर्थिक पैकेज बनाएगी। इसके लिए साढ़े 4 हजार करोड़ का इंतजाम किया गया।
मुख्यमंत्री ने भाजपा पर हमला जारी रखते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर की कारगुजारियों से जयराम सरकार वाकिफ थी, लेकिन चुप्पी साधे रखी, क्योंकि रिश्तेदारों व करीबियों की भर्तियां करवाई जानी थी। सीएम ने कहा कि पुलिस भर्ती का पेपर लीक हुआ। वहां प्रश्नपत्र बिक रहे थे। ऐसा कैसे हो सकता था कि सरकार को पता ही न हो। हमने सत्ता संभालते ही जाल बुना। आज प्रश्नपत्रों को बेचने व खरीदने वाले सलाखों के पीछे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, जेओए 817 के अभ्यर्थी आज भी उनसे मिले। वो आश्वासन देना चाहते हैं कि जल्द ही परिणाम भी जारी होगा और जरूरत पड़ने पर सरकार कानूनी लड़ाई भी लड़ेगी। सीएम ने कहा कि आपदा ने हमसे 550 अनमोल जीवन छीन लिए। भाजपा इसमें भी राजनीति तलाश कर रही थी। सीएम ने कहा कि 4 हजार आशियाने उजड़ गए। 13 हजार घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए। राज्य के इतिहास में ये पहली बार हुआ कि आपदा में 550 जानें गई। ऐसे हालात में वो कैसे रात तो सो सकते थे। 2-2 बजे तक बैठकें चलती थी।मुख्यमंत्री ने कहा कि रोजगार मुहैया करवाने के लिए भर्तियों की प्रक्रिया को तीव्रता से किया जा रहा है। 1261 स्पेशल कमांडोज का विशेष बल बनाया जा रहा है, इसमें महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। हाटी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मिलने के बाद 12 घंटे के भीतर अधिसूचना जारी कर दी गई। यहां तक कि प्रमाणपत्र भी जारी होने शुरू हो गए थे। भाजपा ने हाटी मुद्दे पर भी जमकर सियासत करने की कोशिश की है। इससे पूर्व उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने भी हाटी के मुद्दे पर राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पहले लोकसभा में बिल को पास कर दिया गया, लेकिन इसे 8 महीने तक लटकाए रखा। राज्य सभा में 8 महीने बाद बिल को पारित करवाया गया। इसके बाद राज्य सरकार ने जब कानून पर स्पष्टीकरण मांगा तो इसे भी लटका दिया गया। मुख्यमंत्री ने जब केंद्र से मामला उठाया, तब जाकर स्पष्टीकरण जारी हुआ।