दिशा समीक्षा एवं अनुश्रवण की बैठक हुई आयोजित

सोलन: सोलन ज़िला में केन्द्रीय मंत्रालयों की विभिन्न योजनाओं के कार्यान्वयन एवं प्रगति की समीक्षा एवं अनुश्रवण के लिए ज़िला विकास समन्वय एवं अनुश्रवण समिति (दिशा) की बैठक उपायुक्त कार्यालय के सभागार में आयोजित की गई। शिमला लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुरेश कश्यप ने बैठक की अध्यक्षता की।

सुरेश कश्यप ने सोलन ज़िला में केन्द्र प्रायोजित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत ज़िला सोलन में अभी तक 13185 रोगियों के उपचार पर लगभग 14 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। हिमकेयर योजना के तहत 16066 रोगियों के उपचार पर लगभग 25 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा आयुष्मान भवः अभियान आरम्भ किया गया है। इस अभियान के दौरान विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के बारे में व्यापक जागरूकता लाई जाएगी। इस योजना के तीन प्रमुख घटकों में आयुष्मान आपके द्वार, आयुष्मान मेला और आयुष्मान सभा शामिल हैं। इनसे लोगों को व्यापक स्तर पर लाभ होगा।

सांसद ने कहा कि इस वर्ष हिमाचल प्रदेश में भारी वर्षा से जानो-माल का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि ज़िला सोलन में अभी तक 1214 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं तथा 17 लोगों की दुःखद मृत्यु हुई है। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए कि भारी वर्षा के उपरांत भी जिन मकानों में दरारें आ रही है का पुनः निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें ताकि प्रभावितों को और बेहतर सहायता उपलब्ध करवाई जा सके।
उन्होंने कहा कि सोलन ज़िला में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 192 सड़को का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इस पर अभी तक लगभग 386 करोड़ रुपए व्यय किए गए हंै। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-3 के तहत वर्ष 2022-23 में सोलन ज़िला में 26 सड़कों के निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए है। उन्होंने इन निर्माण कार्याे को सम्बन्धित अधिकारियों को शीघ्र आरम्भ करने के निर्देश दिए।


सुरेश कश्यप ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत सोलन ज़िला में 101 योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनका कार्य प्रगति पर है। उन्होंने जल शक्ति विभाग को ग्रामीण क्षेत्रों में भारी वर्षा से क्षतिग्रस्त हुई पेयजल योजनाओं को शीघ्र बहाल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत इस वर्ष 1379 किसानों द्वारा 440 हैक्टेयर भूमि का बीमा करवाया गया है।
उन्होंने ज़िला के समस्त खण्ड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्षा के कारण हुए नुकसान का कार्य महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गांरटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत करवाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि आवश्यकतानुसार कार्य दिवस को 100 दिन से बढ़ाने के लिए प्रस्ताव उच्च स्तर पर प्रेषित करें। उन्होंने खण्ड विकास अधिकारियों को ग्रामीण क्षेत्रों में भारी वर्षा के कारण क्षतिग्रस्त हुए मार्गों को शीघ्र बहाल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गत वर्ष सोलन ज़िला में 39 सामुदायिक स्वच्छता परिसरों का निर्माण किया गया है।
उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा ने विश्वास जताया कि विभिन्न विकास कार्यों को समय पर पूरा किया जाएगा।
बैठक का संचालन अतिरिक्त उपायुक्त सोलन एवं ज़िला ग्रामीण विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक अजय कुमार यादव ने किया।
इस अवसर पर ज़िला परिषद सोलन के अध्यक्ष रमेश ठाकुर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. राजन उप्पल, विभिन्न पंचायती राज संस्थानों के प्रतिनिधि, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं गैर सरकारी सदस्य उपस्थित थे।
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पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ हेतु 15वीं किस्त के लिए E-KYC अनिवार्य

नाहन : उपायुक्त सुमित खिमटा ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत मिलने वाली 15वीं किस्त जो कि अक्टूबर 2023 में दी जानी प्रस्तावित है। केवल उन्हीं पात्र किसानों को दी जाएगी जिनके ई-केवाईसी, भू-आलेखों का सत्यापन (लैंड सीडिंग) व आधार सीडिंग बैंक अकाउंट के साथ पूरे हो जायेंगे। उन्होंने कहा कि सिरमौर जिला में ई-केवाईसी, लैंड सीडिंग और आधार सीडिंग का कार्य क्रमशः 91 प्रतिशत, 99 प्रतिशत व 92 प्रतिशत ही पूर्ण हुआ जिसे अनिवार्य रूप से शत प्रतिशत किये जाने की आवश्यकता है। सुमित खिमटा ने कहा कि ई-केवाईसी, लैंड सीडिंग और आधार सीडिंग के कार्य को शत प्रतिशत पूरा करने के लिए 18 सितम्बर से 22 सितंबर 2023 तक पंचायत व पटवार सर्किल स्तर पर विशेष शिविर लगाये जा रहे हैं। ई-केवाईसी का कार्य लाभार्थी स्वयं भी पीएम किसान पोर्टल पर जाकर कर सकते हैं। इसके अलावा आधार सीडिंग का कार्य लाभार्थी अपनी बैंक शाखा में जाकर भी करवा सकते हैं। उपायुक्त ने जिला के सभी पात्र किसानों का आह्वान किया है कि सभी किसान निर्धारित तिथि और स्थल पर उपस्थित होकर ई-केवाईसी, लैंड सीडिंग व आधार सीडिंग के कार्य को शत प्रतिशत पूर्ण करना सुनिश्चित बनाएं, ताकि केन्द्र सरकार द्वारा दी जाने वाली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की आगामी 15वीं किस्त की राशि का लाभ उठाया जा सके।

राज्य वन विकास निगम के कर्मचारियों को महंगाई भत्ता एवं बोनस प्रदान करने का निर्णय

शिमला : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में वीरवार को हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम समिति(Forest Development Corporation Committee) के निदेशक मण्डल की 213वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में निगम के कर्मचारियों को 01 जनवरी, 2022 से तीन प्रतिशत महंगाई भत्ता जारी करने की स्वीकृति प्रदान की गई। निदेशक मण्डल ने वर्ष 2022-23 के लिए निगम के कर्मचारियों को बोनस(Bonus) प्रदानकरने का भी निर्णय लिया, जिससे लगभग 253 कर्मचारी लाभान्वित होंगे।

बैठक में निगम में चार वर्ष का सेवाकाल पूर्ण कर चुके दैनिक भोगी सभी पात्र कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने की भी स्वीकृति प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त 01 अप्रैल, 2023 से वन निगम के दैनिक भोगियों और पार्ट टाईम वर्कर्स( part time workers) को बढ़ी हुई दरों पर दिहाड़ी प्रदान करने का भी निर्णय लिया गया।मुख्यमंत्री ने कहा कि वन निगम को सुदृढ़ करते हुए इसे एक आत्मनिर्भर एवं लाभदायी संगठन बनाने के लिए प्रदेश सरकार अपना पूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि निगम में स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए 100 वन मित्र की भर्ती की जाएगी।

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छत पर खेलने गए आठ वर्षीय बालक की गिरने से मौत…

बिलासपुर : पुलिस थाना घुमारवीं के तहत आने वाले निहारी से एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां आठ साल के बालक की छत से गिरने पर मौत हो गई है।

जानकारी के अनुसार बालक के पिता घर पर कुछ काम कर रहे थे। माता खाना बना रही थी और बच्चा छत पर खेलने चला गया। इसी दौरान अचानक छत से गिरने पर वह गंभीर घायल हो गया। शोर सुनने के बाद अचानक माता-पिता बाहर निकले तो पाया कि बेटा छत से नीचे गिरकर बेसुध पड़ा था। जिसके बाद तुरंत उसे सिविल अस्पताल ले जाया गया जहां चिकित्स्कों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने मृतक के पिता राजेश कुमार निवासी संगेडी डाकघर समताणा तहसील बिझड़ी जिला हमीरपुर के बयान के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस को दिए बयान में पिता ने बताया कि वह मौजूदा समय निहारी में किराये के मकान में रहता है तथा दिहाड़ी का काम करता है और उनके तीन बच्चे हैं। वहीं डीएसपी घुमारवीं चंद्रकांत सिंह ने बताया कि मृतक का पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया गया है।

महज 7 साल की उम्र में बना सर्जन, 12 में पास किया B.Sc, अब IIT में कर रहा रिसर्च, जानिए कौन है ये जीनियस

India Most Intelligent Boy: 7 साल की उम्र में जहां अधिकांश बच्चे प्राथमिक स्कूल में बेसिक पढ़ाई कर रहे होते हैं, वहीं हिमाचल प्रदेश का एक बच्चा चिकित्सा के क्षेत्र में नाम रोशन कर रहा था. हिमाचल प्रदेश के नूरपुर का रहने वाला 7 साल का अकृत प्राण जायसवाल नाम के इस लड़का ने आग से जले 8 वर्षीय पीड़ित के हाथों की सर्जरी कर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा. उस समय उसे ‘दुनिया का सबसे कम उम्र सर्जन’ करार कर दिया गया था.

13 साल की उम्र में IQ 146 
यह लड़का एक बार फिर तब सुर्ख़ियों में आया, जब वह महज 12 साल की उम्र में देश का ‘सबसे कम उम्र का विश्वविद्यालय छात्र’ बन गया. मात्र 13 साल की उम्र में उसका आईक्यू 146 था, जो उसके हमउम्र लड़कों के मुकाबले बेहद ज्यादा था. जायसवाल ने इतने कम उम्र में अंतराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति हासिल कर ली थी. यह वजह थी अमेरिका की मशहूर होस्ट ओपरा विन्फ्रे द्वारा आयोजित दुनिया के सबसे फेमस टॉक शो में भी उसे आमंत्रित किया गया था.

पैदा होते ही दिख गए थे लक्षण
कहते हैं न.. ‘पूत के पांव पालने में दिख जाते हैं’ वैसे ही अकृत जायसवाल के अद्वितीय गुणों के लक्षण बचपन में ही दिख गए थे. उसके परिवार के मुताबिक, महज 10 महीने की उम्र में वह चलना बोलना सीख गया था. मात्र 2 साल की उम्र से उसने पढ़ना-लिखना शुरू कर दिया. 5 साल की उम्र से उसने अंग्रेजी क्लासिक्स नावेल पढ़ना शुरू कर दिया था और 7 साल की उम्र में तो उसने एक असाधारण उपलब्धि प्राप्त कर ली थी, जिसने पूरी दुनिया को चकित कर दिया था.

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से मिली मदद
काफी कम उम्र में मेडिकल जीनियस बनने के बाद अकृत को धर्मशाला के माध्यमिक शिक्षा (Secondary Education, Dharamshala) के अध्यक्ष से मार्गदर्शन और सपोर्ट प्राप्त हुआ. उन्होंने महज 12 साल की उम्र में विज्ञान की पढ़ाई के लिए उसे चंडीगढ़ विश्वविद्यालय (Chandigarh University) में दाखिला दिलवाया. 17 साल की उम्र में, वह एप्लाइड केमिस्ट्री में मास्टर डिग्री हासिल कर ली थी.

खोज रहे हैं कैंसर का इलाज
आखिरकार, अकृत को अपने लक्ष्य को पाने का मौका मिला. शुरू से ही वह कैंसर का इलाज खोजना चाहता था. उन्होंने प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (IIT Kanpur) में आईआईटी कानपुर में दाखिला लिया है. फ़िलहाल वह यहां बायोइंजीनियरिंग (Bioengineering) की पढ़ाई कर रहे हैं.

Himachal Cabinet Meeting: मानसून सत्र से पहले सुक्खू सरकार की कैबिनेट बैठक, कई विभागों में भर्तियों को मिल सकती है झरी झंडी

शिमला : हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार की आज कैबिनेट बैठक होगी. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में विधानसभा सत्र को लेकर चर्चा होगी. इसके अलावा इस बैठक में नई भर्ती एजेंसी के साथ ही विभिन्न विभागों में भर्तियों को हरी झंडी मिल सकती है. सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अध्यक्षता में गुरुवार को कैबिनेट बैठक होने जा रही है. इस बैठक में विधानसभा सत्र को लेकर चर्चा होगी. विधानसभा सत्र 18 सितंबर से शुरू होने जा रहा है. विधानसभा में लाए जाने वाली संशोधन विधेयकों के साथ ही इस सत्र को लेकर व्यापक चर्चा इस बैठक में होगी. इस बैठक में सरकार नई भर्ती एजेंसी के गठन को लेकर भी फैसला कर सकती है. बता दें कि प्रदेश में कर्मचारी चयन आयोग को भंग हुए छह माह से अधिक का समय हो चुका है. प्रदेश के विभिन्न विभागों में भर्तियां इस कारण नहीं हो पाई हैं. विपक्ष लगातार भर्तियों में देरी को लेकर सरकार को घेर रहा है और विधानसभा सत्र के दौरान भी विपक्ष सरकार को घेर सकता है. ऐसे में कैबिनेट नए भर्ती एजेंसी को लेकर कोई फैसला ले सकती है.

कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, वन सहित दूसरे विभागों में भर्तियों के मामले मंजूरी के लिए लाए जा सकते हैं. प्रदेश में सरकार को बने हुए नौ माह हो चुके हैं. अभी तक केवल शिक्षा विभाग में ही भर्तियों को मंजूरी दी गई है. वहीं अधिकतर महकमों में पदों को भरने की मंजूरी नहीं मिली है. जबकि इनमें भी स्टाफ की कमी है, ऐसे में सरकार इस बैठक में नई भर्तियों को लेकर मंजूरी दे सकती है.

कैबिनेट में खंड शिक्षा स्रोत समन्वयक (बीआरसीसी) की नियुक्ति के लिए नई पॉलिसी आ सकती है. इसके तहत 10 वर्ष का नियमित शिक्षण अनुभव रखने वाले शिक्षकों को इस पद पर नियुक्ति दी जा सकती है. नियुक्ति की यह अवधि 3 वर्ष के लिए किए जाने की संभावना है. इसके लिए शिक्षा विभाग ने इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिस पर कैबिनेट की मुहर लगाने की पूरी संभावना है.

हिमाचल में भाजयुमो की नई टीम घोषित, शनी शुक्ला बने महामंत्री

शिमला  : भारतीय जनता पार्टी (BJP) युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष तिलक राज शर्मा ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से चर्चा के उपरांत युवा मोर्चा के प्रदेश पदाधिकारियों एवं जिलाध्यक्षों की घोषणा की है। इसमें कई नए चेहरों को जगह मिली है। हमीरपुर से ताल्लुक रखने वाले शनी शुक्ला को प्रदेश महामंत्री का जिम्मा मिला है। वह एक दशक तक एबीवीपी (ABVP) के छात्र नेता रहे हैं। नई टीम में पांच उपाध्यक्षों, दो महामंत्री और छह सचिव शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही 17 संगठनात्मक जिला अध्यक्षों की भी घोषणा की गई है। तिलक राज ने बताया कि प्रदेश उपाध्यक्ष भुवनेश ठाकुर, सुशील कडशोली, भवानी सिंह पठानिया, सुनील नेगी और नीलम कुमारी होंगे। प्रदेश महामंत्री सन्नी शुक्ला और साकेश शर्मा होंगे।

भाजयुमो के प्रदेश सचिव जगदीप शर्मा, पृथ्वी राज ठाकुर, हर्ष सूद, रोहित ठाकुर, करनैल सिंह और नरेन्द्र ठाकुर होंगे। प्रदेश कोषाध्यक्ष मोहर चंद भारद्वाज (मोनू) नियुक्त किए गए। जबकि प्रदेश कार्यालय सचिव विनिल पाल होंगे। इसके अलावा मुख्य प्रवक्ता अजय चौहान, प्रवक्ता देवेन्द्र ठाकुर, सौरभ धीमान,कमल सैणी, देवेन्द्र राणा, विनय छिंटा, मुस्कान, दीक्षा वर्मा और अरुण चौहान समराण होंगे।

मीडिया प्रभारी अमित होंगे उनके साथ सह मीडिया प्रभारी आशीष ठाकुर, साहिल, हरप्रीत सैणी, अरविन्द कुमार, सुनील शर्मा और अभिमन्यु भागड़ा होंगे। सोशल मीडिया संयोजक अभिनव ठाकुर, सह संयोजक अजय राणा, आईटी संयोजक कर्तव्य वैद्य, सह संयोजक सुश्री रीना नड्डा होंगे।

तिलक राज ने बताया कि युवा मोर्चा ने 17 संगठनात्मक जिला के जिला अध्यक्षों की घोषणा की जिसमें चंबा का जिला अध्यक्ष विनायक रैणा, कांगड़ा तपन मन्हास, नूरपुर राहुल कालिया, देहरा रमन शर्मा, पालमपुर राकेश कुलेठी, लाहौल स्पीति राहुल धुंशी, कुल्लू जनेश ठाकुर, मंडी योगेश ठाकुर, सुंदरनगर उत्कर्ष चौधरी, हमीरपुर कपिल मोहन शर्मा, ऊना संदीप शर्मा, बिलासपुर मनोज कुमार, सिरमौर रणवीर सिंह ठाकुर, सोलन भूपेन्द्र ठाकुर, महासु अतुल शर्मा, शिमला हनीश चोपड़ा और किन्नौर ललित मोहन जिला अध्यक्ष होंगे।

तिलक राज ने कहा कि युवा जोश और अनुभव के साथ युवा मोर्चा और मजबूत एवं शक्तिशाली होगा। युवा मोर्चा संगठन को मजबूत बनाते हुए, प्रदेश के युवाओं के हक के लिए लड़ेगा।

प्रदेश में फोरलेन के निर्माण के कारण हुआ सबसे ज्यादा नुकसान : अनिल शर्मा

मंडी : हिमाचल प्रदेश में बरसात में हुई भयंकर तबाही का कारण प्रदेश में अवैज्ञानिक तरीके से हो रहे फोरलेन का निर्माण है। जिसके कारण पहाड़ों को काटा गया और तबाही का मंजर सभी और देखने को मिला। इसके बाद आज हिमाचल प्रदेश में आई आपदा से निपटने के लिए सभी को पार्टी स्तर से … Read more

आधार से न जोड़ा तो बंद हो सकता है राशन कार्ड, 30 सितंबर तक बढ़ी मोहलत

शिमला : हिमाचल में आपदा की वजह से उपभोक्ता राशन कार्ड का ई-केवाईसी सत्यापन नहीं करवा पाए। लिहाजा, खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग ने उपभोक्ताओं के लिए राहत दी है। राशन कार्ड उपभोक्ता अब 30 सितंबर तक अपने राशन कार्ड का सत्यापन करवा सकते हैं। राज्य के खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता मामले में विभाग ने राशन कार्ड धारकों के लिए ई-केवाईसी सत्यापन की अवधि बढ़ा दी है। प्रदेश में 19 लाख से अधिक राशन कार्ड धारक हैं। आधार कार्ड और राशन कार्ड में दर्शाई उपभोक्ता की सूचना का आपस में मिलान करने के मकसद से सत्यापन करवाया जा रहा है। निर्धारित समय अवधि के भीतर अगर आधार को राशन कार्ड से जोड़ा न गया तो उपभोक्ताओं के राशन कार्ड बंद हो सकते हैं। इससे पहले विभाग ने सत्यापन के लिए 31 अगस्त अंतिम तिथि तय की थी। लेकिन अब खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता मामले में विभाग ने राशन कार्ड का सत्यापन कराने की तिथि 30 सितंबर तक बढ़ा दी है।

सत्यापन न होने पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सस्ते राशन का लाभ भी नहीं मिलेगा। इसके अलावा खाद्य आपूर्ति विभाग ने आपदाग्रस्त परिवारों को बड़ी राहत दी है, जिसमें अगस्त माह का राशन उपभोक्ता सितंबर माह में ले सकेंगे। विभाग ने ई-केवाईसी की तारीख इसलिए बढ़ाई है, ताकि कोई उपभोक्ता राशन लेने से वंचित न रहे।

Hindi Diwas 2023: क्यों मनाया जाता है हिंदी दिवस? जानिए इतिहास और महत्व

Hindi Diwas 2023: भारत का संविधान किसी भी भाषा को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा नहीं देता है। लेकिन देवनागरी लिपि में हिंदी अनुच्छेद 343 के अनुसार भारत में केंद्र सरकार और संघ की आधिकारिक भाषा है। हिंदी इंडो-आर्यन भाषा अंग्रेजी और मंदारिन चीनी के बाद विश्व स्तर पर सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। कई रिपोर्ट्स क मानें तो दुनिया भर में 600 मिलियन लोग एक दूसरे संचार करने के लिए हिंदी भाषा का प्रयोग माध्यम के रूप में करते हैं। कब मनाया जाता है हिंदी दिवस
हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषाओं में से एक के रूप में अपनाने के उपलक्ष्य में हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। जिसे हिंदी दिवस के रूप में भी जाना जाता है।

इतिहास
भारत की संविधान सभा ने 14 सितंबर, 1949 को देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया। आधिकारिक तौर पर पहला हिंदी दिवस 14 सितंबर, 1953 को मनाया गया था। हिंदी को आधिकारिक भाषाओं में से एक के रूप में अपनाने के पीछे का कारण अनेक भाषाओं वाले राष्ट्र में प्रशासन को सरल बनाना था। हिंदी को राजभाषा के रूप में अपनाने के लिए कई लेखकों, कवियों और कार्यकर्ताओं की तरफ से भी प्रयास किया गया था।

महत्व
हिंदी दिवस को मनाने के पीछे एक कारण यह है कि देश में अंग्रेजी भाषा के बढ़ते चलन और हिंदी की उपेक्षा को रोकना है। आपको बता दें कि महात्मा गांधी ने हिंदी को जन-जन की भाषा भी कहा था। हिंदी दिवस के दिन पूरे देश में कई साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें लोग हिंदी साहित्य के महान कार्यों का जश्न मनाते हैं। राजभाषा कीर्ति पुरस्कार और राजभाषा गौरव पुरस्कार भी हिंदी दिवस पर मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (पीएसयू), राष्ट्रीयकृत बैंकों और नागरिकों को उनके योगदान व हिंदी को बढ़ावा देने के लिए दिए जाते हैं। 14 सितंबर को स्कूलों और कॉलेजों में भी हिंदी दिवस के महत्व को लेकर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।