शिमला: हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्मार्ट बिजली मीटर लगाने को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं, जिसके चलते आज कपाहड़ा पंचायत के ग्रामीण घुमारवी में अधिशासी अभियंता (XEN) का घेराव करने जा रहे हैं। इससे पहले ग्रामीणों की ओर से शिमला-धर्मशाला हाईवे को जाम करने की चेतावनी दी गई थी, जो शिमला राज्य के 9 जिलों को जोड़ता है, लेकिन आगामी फेस्टिवल सीजन के दौरान आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो, यह ध्यान में रखते हुए आखिरी समय पर हाईवे जाम करने का निर्णय बदलकर XEN कार्यालय के घेराव का फैसला लिया गया।
पंचायत प्रधान का बिजली कनेक्शन काटने से उपजा विवाद
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब स्मार्ट मीटर लगवाने से साफ इनकार करने पर बिजली बोर्ड द्वारा कपाहड़ा पंचायत के प्रधान विनय शर्मा के घर का बिजली कनेक्शन ही काट दिया गया। इस कार्रवाई के विरोध में पंचायत प्रधान विनय शर्मा ने कड़ा रुख अपनाते हुए बिजली बोर्ड को एक नोटिस जारी कर उनकी निजी जमीन पर लगे बिजली के खंभे, तार और अन्य तमाम बुनियादी ढांचे को हटाने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। साथ ही उन्होंने जमीन के इस्तेमाल के एवज में उचित मुआवजे की मांग भी की है। पंचायत प्रधान ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस मामले को लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है, और जब वह अब बिजली बोर्ड के उपभोक्ता ही नहीं रहे, तो उनकी जमीन पर लगे पोल और तार भी वहां से हटाए जाने चाहिए।
स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली और वित्तीय बोझ को लेकर चिंताएं
प्रधान विनय शर्मा ने स्मार्ट मीटरों से बिजली के बिलों में भारी बढ़ोतरी होने की आशंका जताई है। उनका तर्क है कि इन मीटरों का पूरा प्रबंधन निजी कंपनियों के हाथों में होने के कारण उपभोक्ताओं के मन में बिल और नियंत्रण को लेकर गंभीर चिंताएं बनी हुई हैं। उन्होंने यह भी बड़ा सवाल उठाया है कि लगभग 10,000 रुपये की भारी कीमत वाले इन मीटरों के खराब होने या तकनीकी खराबी आने पर उन्हें बदलने का वित्तीय बोझ आखिर गरीब परिवारों पर क्यों डाला जाएगा और इसे कौन सहन करेगा। प्रधान का सीधा आरोप है कि बिजली विभाग जनता की इन वाजिब शंकाओं का समाधान करने के बजाय उन पर जबरन दबाव बनाने की नीति अपना रहा है।





