लाइव हिमाचल/शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के चर्चित नवजात अदला-बदली मामले में सिविल जज कोर्ट नंबर-5 ने ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है। सिविल जज सुष्मिता शर्मा की अदालत ने कमला नेहरू अस्पताल (KNH) में हुई गंभीर लापरवाही के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार को पीड़िता शीतल ठाकुर को 30 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकारी अस्पताल में कार्यरत डॉक्टरों और कर्मचारियों की लापरवाही के लिए राज्य सरकार की सीधी जिम्मेदारी बनती है। गौर हो कि मई 2016 में संजौली निवासी शीतल ठाकुर के प्रसव के बाद अस्पताल कर्मियों ने परिजनों को लड़का होने की सूचना दी थी, लेकिन बाद में उन्हें एक बच्ची सौंप दी गई। परिजनों के विरोध के बावजूद जब अस्पताल ने सुनवाई नहीं की, तो दंपती ने निजी लैब में डीएनए जांच कराई, जिसमें सच सामने आया। बाद में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से डीएनए मिलान कर जैविक माता-पिता की पहचान हुई और शीतल को उनका बेटा वापस मिल सका। इस गंभीर मानसिक पीड़ा और बच्चे के प्राकृतिक स्नेह से वंचित रहने के एवज में अदालत ने राज्य सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए पीड़िता के पक्ष में 30 लाख रुपये का मुआवजा तय किया है।





