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संसद में गूंजा हाइड्रोजन ट्रेन का मुद्दा: सांसद डॉ. सिकंदर कुमार के सवाल पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का बड़ा खुलासा

दिल्ली: राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश महामंत्री भाजपा डॉ. सिकंदर कुमार द्वारा संसद में भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को लेकर पूछे गए तीखे सवालों पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विस्तृत जवाब दिया। सांसद डॉ. सिकंदर कुमार ने हाइड्रोजन रेलगाड़ी की निर्माण लागत, प्रायोगिक मार्गों, ग्रीन प्रोपल्शन प्रणाली से होने वाले पर्यावरण लाभ तथा उच्च दबाव वाले हाइड्रोजन से निपटने के लिए कर्मचारियों के सुरक्षा प्रशिक्षण को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी।

141 करोड़ की लागत से तैयार हुई भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन:

सांसद के सवालों का जवाब देते हुए रेल, सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सदन को सूचित किया कि भारतीय रेल ने हाइड्रोजन संचालित रेलगाड़ी प्रौद्योगिकी को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से 141 करोड़ रुपये की लागत से इस प्रायोगिक परियोजना को विकसित किया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में यह 10 डिब्बों वाली और 2400 किलोवाट क्षमता की दुनिया की सबसे शक्तिशाली और लंबी हाइड्रोजन ट्रेनसेट है, जिसे पूरी तरह से भारत में स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया गया है।

जींद-सोनीपत रूट पर ट्रायल शुरू, शून्य कार्बन उत्सर्जन से पर्यावरण को मिलेगा बढ़ावा:

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस ट्रेन के संचालन के लिए जींद में एक समर्पित हाइड्रोजन संयंत्र स्थापित किया गया है। वर्तमान में भारतीय रेल ने जींद-सोनीपत सर्किट पर इसका प्रायोगिक संचालन शुरू कर दिया है। फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित यह ट्रेन बिना किसी ध्वनि प्रदूषण के चलेगी और इसका परिचालन शून्य कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन सुनिश्चित करता है, जिससे केवल जल वाष्प (Water Vapor) ही बाहर निकलेगा।

कर्मचारियों के लिए तैयार किए गए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल:

सदन में सुरक्षा मानकों की जानकारी देते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि उच्च दबाव वाली हाइड्रोजन प्रणाली से जुड़े खतरों को देखते हुए परिचालन कर्मचारियों के लिए विशिष्ट सुरक्षा दस्तावेज और प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए गए हैं। इसके अलावा, हाइड्रोजन संयंत्र को पेट्रोलियम तथा विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) के सख्त दिशा-निर्देशों के अनुसार स्थापित किया गया है, जो रेलवे को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक नया आयाम प्रदान करेगा।

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