लाइव हिमाचल/शिमला: राजधानी शिमला में रविवार रात हुई बारिश के बाद सोशल मीडिया पर शिक्षण संस्थानों को बंद करने संबंधी एक आदेश तेजी से वायरल हो रहा है। जिला प्रशासन ने इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि यह पत्र पूरी तरह फर्जी और भ्रामक है। प्रशासन की ओर से ऐसा कोई भी अवकाश घोषित नहीं किया गया है।
उपायुक्त के नाम व फर्जी हस्ताक्षरों का दुरुपयोग:
वायरल हो रहे फर्जी पत्र में जिला शिमला के सभी सरकारी व निजी स्कूलों, कॉलेजों, आंगनबाड़ी केंद्रों, आईटीआई, पॉलिटेक्निक, कोचिंग सेंटरों और नर्सिंग संस्थानों को बंद रखने का दावा किया गया है। पत्र में उपायुक्त (DC) एवं अध्यक्ष, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) शिमला के नाम व फर्जी हस्ताक्षरों का भी गलत इस्तेमाल किया गया है।
आधिकारिक माध्यमों से ही जारी होते हैं आदेश:
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार के अवकाश या आपदा संबंधी आदेश केवल प्रशासन और संबंधित विभागों के आधिकारिक माध्यमों से ही जारी किए जाते हैं। सोशल मीडिया पर प्रसारित इस फर्जी पत्र को आधिकारिक न माना जाए। प्रशासन ने आम जनता, विद्यार्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि वे बिना पुष्टि के ऐसे भ्रामक पत्रों को सोशल मीडिया पर शेयर या फॉरवर्ड न करें।
सरकारी अधिकारी के नाम के दुरुपयोग पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई:
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार के अवकाश या आपदा संबंधी आदेश केवल प्रशासन और संबंधित विभागों के आधिकारिक माध्यमों से ही जारी किए जाते हैं। सोशल मीडिया पर प्रसारित इस फर्जी पत्र को आधिकारिक न माना जाए। प्रशासन ने आम जनता, विद्यार्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि वे बिना पुष्टि के ऐसे भ्रामक पत्रों को सोशल मीडिया पर शेयर या फॉरवर्ड न करें।
सरकारी अधिकारी के नाम के दुरुपयोग पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई:
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार करना और वरिष्ठ अधिकारियों के नाम व हस्ताक्षरों का दुरुपयोग करना बेहद गंभीर अपराध है। किसी शरारती तत्व द्वारा बारिश का फायदा उठाकर माहौल खराब करने की नीयत से यह पत्र बनाया गया है। ऐसे भ्रामक आदेश को तैयार करने और सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।





