लाइव हिमाचल/कसौली/हेमेंद्र कंवर: महलोग क्षेत्र की प्रमुख सामाजिक संस्था आपकी आवाज पटटा महलोग के संस्थापक राजकुमार शर्मा उर्फ राजू भाई ने हिमाचल पदेश की पंचायतों में चल रही वेंडर प्रणाली की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर मौजूदा वेंडर प्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है उन्होंने प्रदेश सरकार से वर्तमान वेंडर प्रणाली पर कई आवश्यक संशोधन करने की जोरदार वकालत की है ताकि प्रदेश की पंचायतों में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाया जा सकें उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं में वेंडर प्रक्रिया को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों से विरोध के स्वर उठने लगे हैं।उन्होंने सरकार से इस प्रणाली में जारी कमियों को तुरंत संशोधन करने की मांग की है ।आपकी आवाज पट्टा महलोग सामाजिक संस्था के संरक्षक राज कुमार शर्मा (राजू भाई) ने पंचायतों में लागू इस प्रणाली की व्यावहारिक समस्याओं को रेखांकित करते हुए प्रदेश सरकार से इसमें तुरंत कड़ा संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था के तहत एक ही पंचायत में 5 से 7 वेंडरों को सूचीबद्ध किया जा रहा है। इस बहु-वेंडर प्रणाली से धरातल पर विकास कार्यों में भारी बाधा आ रही है। यदि निर्माण कार्य के दौरान कोई एक वेंडर समय पर सामग्री (रेत, बजरी, सीमेंट आदि) की आपूर्ति नहीं करता, तो पूरे विकास कार्य की प्रगति रुक जाती है।उन्होंने कहा कि
धरातल से मिल रही जानकारियों का हवाला देते बताया कि इस प्रणाली में भारी भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी पनप रही है। कई पंचायतों में वेंडर केवल नाम के बने हुय हैं और 5% से 10%तक व इससे अधिक मोटी कमीशन लेकर फर्जी बिल उपलब्ध करवा रहे हैं, जबकि निर्माण सामग्री की सप्लाई पंचायत प्रतिनिधि या उनके खास लोग खुद कर रहे हैं।
इसके अलावा, कई प्रतिनिधि नियमों को ताक पर रखकर अपने रिश्तेदारों को वेंडर बनवा रहे हैं जबकि नियम के अनुसार ऐसा नहीं हो सकता ।उन्होंने कहा कि पंचायतों में
फर्जी वेंडरों को बाहर करने के लिए आवेदन के समय 2 से 3 लाख रुपये की सिक्योरिटी लेनी आवश्यक की जाए, ताकि पंचायतों में फर्जी बिल देने वाले वेंडर बाहर हो सके।उन्होंने कहा कि पदेश की कुछ पंचायतों ने फर्जी वेंडरों को बाहर करने व पंचायत में किसी विवाद से बचने के लिए वेंडरों से दो,तीन लाख तक की सिक्योरिटी राशि ली जा रही हैं । सिक्योरिटी राशि पर वेंडर को ब्याज मिलने का भी प्रावधान है जो कि स्वागत योग्य है उन्होंने साथ ही वेंडरों के
कोटेशन के साथ वेंडर के जीएसटी नंबर की जांच आबकारी एवं कराधान विभाग से करवाई जाए कि जीएसटी नंबर निर्माण सामग्री सप्लाई का ही है या किसी अन्य कारोबार का, और टैक्स रिकॉर्ड साफ है या नहीं।इसके साथ हीं उन्होंने वेंडरों के लिए पारदर्शी आवेदन प्रक्रिया होने पर पंचायत से तय शुल्क पर आवेदन फॉर्म मिलने की मांग की । राजकुमार शर्मा ने पदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखु,पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह से मांग की है कि पंचायतों में भ्रष्टाचार रोकने के लिए वेंडर प्रणाली में संशोधन करने की मांग की है।




