लाइव हिमाचल/शिमला : हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक और पारंपरिक धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। प्रदेश के चार और पारंपरिक उत्पादों—चंबा के पांगी क्षेत्र के भोट जौ, चंबा चुख, भरमौर के एलेक्ट्रोस शहद और सिरमौर के अदरक—को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग दिलाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। हाल ही में प्रदेश के आठ अन्य उत्पादों, जिनमें स्पीति का सी-बकथॉर्न (छरमा), सलूणी सफेद मक्का, चंबा मेटल आर्ट, सिरमौरी लोइया, किन्नौरी टोपी, मंडी की सेपुबड़ी, किन्नौरी सेब और किन्नौरी आभूषण शामिल हैं, को जीआई पंजीकरण मिलने से राज्य के कुल जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की संख्या अब 17 हो गई है। हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद (हिमकॉस्ट) के माध्यम से मिली इस सफलता पर मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने अधिकारियों को बधाई दी और शेष चार उत्पादों का पंजीकरण जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जीआई टैग से इन उत्पादों की मौलिकता सुरक्षित रहेगी, बाजार में मांग और मूल्य बढ़ेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। वहीं, जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव सुशील कुमार सिंगला ने स्पष्ट किया कि इस पंजीकरण से उत्पादों को नकली और अनाधिकृत उपयोग से कानूनी संरक्षण मिलेगा, जो कुल्लू शाल, कांगड़ा चाय और चंबा रूमाल जैसे पहले से प्रमाणित उत्पादों की तरह हिमाचल की पहचान को और समृद्ध करेगा।




