शिमला: अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस के अवसर पर हिमाचल प्रदेश सरकार ने नशा माफियाओं की कमर तोड़ते हुए इतिहास की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया है। सूबे के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू द्वारा शुरू किए गए ऐतिहासिक “एंटी-चिट्टा जन आंदोलन” और राज्य सरकार की नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत आज प्रदेश के 10 अलग-अलग स्थानों पर एक साथ करीब 13.28 करोड़ रुपये की जब्त नशीली दवाओं को वैज्ञानिक तरीके से नष्ट कर दिया गया। मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत की अध्यक्षता और पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार तेवारी की विशेष मौजूदगी में हुए इस महा-अभियान ने नशा तस्करों के पूरे नेटवर्क को एक कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है कि देवभूमि में मौत के इस व्यापार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार की यह जंग सिर्फ नशीले पदार्थों को नष्ट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि आज इसे जन-आंदोलन का रूप देते हुए प्रदेश की नशा प्रभावित पंचायतों में ड्रग प्रिवेंशन कमेटियों की बैठकें आयोजित की गईं, और स्कूलों, कॉलेजों से लेकर सरकारी दफ्तरों तक लाखों लोगों को ‘एंटी-चिट्टा ई-प्लेज’ यानी नशा मुक्ति की डिजिटल शपथ दिलाई गई। हिमाचल प्रदेश पुलिस ने इस लड़ाई में आम जनता से भी बड़ी अपील की है कि वे नशे के भंडारण, बिक्री या तस्करी से जुड़ी कोई भी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहते हुए डायल 112 या नजदीकी थाने में साझा करें, ताकि सख्त कानून व्यवस्था, जनभागीदारी और सरकार के दृढ़ संकल्प के साथ “नशा मुक्त हिमाचल” के सपने को शत-प्रतिशत साकार किया जा सके।





