नेशनल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर अपने फैसलों से देश को चौंका दिया है। ईरान युद्ध के कारण उपजे वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच, पीएम मोदी ने न केवल देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील की, बल्कि खुद इसे अमल में लाकर एक मिसाल पेश की है। आज कैबिनेट की बैठक में पीएम मोदी का जो रूप दिखा, उसने सबको हैरान कर दिया। तस्वीरें गवाह हैं एक बड़े बदलाव की। आज जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैबिनेट की बैठक के लिए निकले, तो उनके पीछे गाड़ियों की लंबी कतार नहीं थी। पीएम मोदी आज महज 4 गाड़ियों के काफिले के साथ बैठक में पहुंचे। ऊर्जा संकट की गंभीरता को देखते हुए पीएम ने खुद अपने काफिले में कटौती कर देश को सादगी और बचत का संदेश दिया है। वहीं प्रधानमंत्री की इस पहल का असर तत्काल देखने को मिला। गृह मंत्री अमित शाह ने भी अपने काफिले को आधा कर दिया है। अमित शाह भी आज सिर्फ 4 कारों के साथ कैबिनेट मीटिंग में शामिल होने पहुंचे। सरकार के इन शीर्ष नेताओं का यह कदम बताता है कि ऊर्जा संरक्षण अब सिर्फ नारा नहीं, बल्कि मिशन बन चुका है। आमतौर पर भारत के प्रधानमंत्री का काफिला बेहद भव्य और अभेद्य होता है। आइए आपको बताते हैं कि सामान्य स्थिति में पीएम मोदी की सुरक्षा का घेरा कैसा होता है:
- भारत के प्रधानमंत्री के काफिले में सामान्य स्थिति में 12-15 गाड़ियां होती हैं.
- प्रधानमंत्री मोदी की BMW पर AK-47, हैंड ग्रेनेड का असर भी नहीं होता है. टायर पंचर होने पर भी 90 किमी/घंटा की स्पीड से 320 किमी चल सकती है.
- पीएम के काफिले को दिल्ली पुलिस की कार लीड करती है और रास्ता क्लियर करती है, ट्रैफिक कंट्रोल करने का भी जिम्मा इन पर होता है.
- SPG की पायलट कार भी पीएम के काफिले के साथ चल खतरे की एडवांस स्कैनिंग करती है.
- प्रधानमंत्री के काफिले के साथ जैमर कार भी होती है. जैमर कार के ऊपर लगे एंटीना से सड़क के दोनों तरफ 100 मीटर तक IED/रिमोट बम को डिफ्यूज कर सकती है.
- PM की कार जैसी डमी कारें भी काफिले के साथ चलती हैं, जो किसी भी हमले को भ्रमित करने के लिए चलाई जाती हैं.
- मर्सिडीज बेंज एंबुलेंस भी पीएम के काफिले के साथ चलती हैं. ये किसी भी मेडिकल इमरजेंसी के लिए PM मोदी के साथ चलती हैं.
- प्रधानमंत्री की सुरक्षा में रहने वाली NSG कमांडो की गाड़ियां भी काफिले के साथ चलती हैं।
इतनी कड़ी सुरक्षा और तामझाम के बावजूद, आज सिर्फ 4 गाड़ियों का दिखना एक बड़े रणनीतिक और प्रतीकात्मक बदलाव की ओर इशारा करता है। दुनिया जब युद्ध और ऊर्जा संकट से जूझ रही है, तब प्रधानमंत्री मोदी ने खुद से शुरुआत कर देश को ‘बचत’ का मंत्र दिया है। पीएम मोदी का यह छोटा काफिला आज देश में एक बड़ी चर्चा का विषय बन गया है। अब देखना यह है कि देश की जनता और अन्य नेता इस अपील को कितनी गंभीरता से लेते हैं।





