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BJP की नीयत में खोट: असली बिल 2023 में पास हुआ, अब परिसीमन के बहाने रची जा रही साजिश : जगत सिंह नेगी

Womens Reservation Bill: महिला आरक्षण बिल पर हिमाचल के मंत्री जगत सिंह नेगी ने BJP पर परिसीमन के बहाने साजिश रचने का आरोप लगाया है. उन्होंने RSS पर तंज कसा कि उनके संगठन में कोई महिला नहीं है. लोकसभा में ‘महिला आरक्षण बिल’ के पास न हो पाने को कांग्रेस अपनी बड़ी जीत के रूप में पेश कर रही है. बिल गिरने के बाद हिमाचल प्रदेश के राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा जुबानी हमला बोला है. उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह महिला आरक्षण के नाम पर केवल अपना राजनीतिक फायदा लेना चाहती थी, जिसका विपक्ष ने सदन में डटकर मुकाबला किया और इस साजिश को नाकाम कर दिया। शिमला में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि असली महिला आरक्षण बिल तो 2023 में ही पारित हो चुका था, लेकिन बीजेपी ने उसे लागू करने की बजाय रोक कर रखा. उन्होंने आरोप लगाया कि अब संशोधन के जरिए बीजेपी आरक्षण के नाम पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहती थी. इस बिल की आड़ में देशभर में परिसीमन लागू कर बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों के चुनाव को ध्यान में रखकर लाभ लेने की रणनीति बनाई जा रही थी, जिसे जनता अब समझ चुकी है.

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते हुए नेगी ने स्पष्ट किया कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है. उन्होंने कहा कि मौजूदा 545 सीटों के भीतर ही महिलाओं को आरक्षण दिया जाए, इसमें पूरा विपक्ष सरकार का सहयोग करने के लिए तैयार है. परिसीमन के जरिए बीजेपी केवल बड़े राज्यों में फायदा उठाना चाहती थी. बीजेपी द्वारा कांग्रेस को ‘महिला विरोधी’ बताए जाने पर नेगी ने पलटवार करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर करारा तंज कसा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 1996 में सबसे पहले महिला आरक्षण का मुद्दा उठाया था. RSS पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “जो खुद को दुनिया का सबसे बड़ा संगठन बताते हैं, उनके संगठन में महिलाओं की कोई भागीदारी ही नहीं है. उसमें सिर्फ निक्कर वाले ही हैं, जो अब निक्कर से पैंट में आ गए हैं, लेकिन उनके पास कोई महिला नहीं है। सदन में राहुल गांधी द्वारा ‘मदारी’ और ‘जादूगर’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर बीजेपी की आपत्ति का भी नेगी ने जवाब दिया. उन्होंने कहा कि ये शब्द किसी भी तरह से असंसदीय नहीं हैं. सदन में अपनी बात रखने का सभी को अधिकार है. बीजेपी को मर्यादा की सीख देने से पहले खुद आत्ममंथन करना चाहिए कि वे सदन में पंडित जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी के खिलाफ किस तरह के शब्दों का प्रयोग करते हैं।

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