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कर्मचारियों की गृह जिले में बार-बार तैनाती पर लगी रोक, हाईकोर्ट ने तबादला नीति में बदलाव के दिए निर्देश

न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश राकेश कैंथला की खंडपीठ ने सरकार को यह सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं कि वहां पर कोई अवैध तरीके से प्रतिबंधित प्रजातियों के पेड़ों का कटान न हो।

शिमला : प्रदेश हाई कोर्ट ने स्टेट कैडर के कर्मचारियों से जुड़ी स्थानांतरण नीति में ऐसे प्रविधान शामिल करने के आदेश दिए हैं, जिनके अनुसार ऐसे कर्मचारी प्रारंभिक नियुक्ति के बाद कम से कम दो या तीन लगातार नियुक्तियों तक गृह जिले में तैनात न किया जाए। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिए हैं कि स्थानांतरण नीति में ऐसे प्रविधान भी शामिल किए जाने चाहिए कि अगर कोई स्टेट कैडर कर्मचारी पहले से गृह जिले में तैनात रहा हो तो उसका तबादला उसी जिले में अन्य स्थान पर न किया जाए। साथ ही तैनाती के दो स्थानों के बीच न्यूनतम दूरी 100-150 किलोमीटर तक होनी चाहिए। ताकि भेदभाव और पक्षपात न सके। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने सरकार को आदेश दिए हैं कि वह सभी कर्मचारियों की तैनाती से संबंधित जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध करवाने पर भी विचार करे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किसी विशेष कर्मचारी ने किसी विशेष स्थान पर कुल कितनी सेवा अवधि पूरी की है। इसके लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि जब कोई कर्मचारी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर किसी स्थान पर दो वर्ष या इससे अधिक सेवा अवधि पूरी कर ले तो उसका नाम किसी लाल बिंदु (रेड डाट) या संकेत के माध्यम से विशेष रूप से प्रदर्शित हो। इससे स्पष्ट हो जाएगा कि उक्त कर्मचारी ने उस स्थान पर निर्धारित सेवा अवधि पूरी कर ली है। यह अवधि तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए तीन वर्ष तथा अन्य के लिए दो वर्ष निर्धारित की जा सकती है। इसके अलावा आनलाइन माध्यम से विभिन्न स्थानों पर रिक्त पदों की उपलब्धता भी प्रदर्शित की जानी चाहिए। ताकि विभाग कर्मचारियों का तबादला पारदर्शी तरीके से कर सके। ऐसा करना इसलिए आवश्यक है, ताकि तबादला प्रक्रिया को लेकर व्याप्त इस धारणा को दूर किया जा सके कि यह प्रक्रिया मात्र व्यवसाय बन गई है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को इन टिप्पणियों के संबंध में उत्तर प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। अगली सुनवाई 16 अप्रैल को निर्धारित की है। कोर्ट ने आदेश की प्रति प्रधान सचिव (शिक्षा), प्रदेश सरकार, प्रधान सचिव (स्वास्थ्य), प्रधान सचिव (राजस्व) को भी उपलब्ध करवाने को कहा है। आमतौर पर तबादले के अधिकतर मामले इन्हीं विभागों से जुड़े होते हैं। कोर्ट ने याचिका रद करते कहा कि न्यायालय इस बात से दुखी है कि याचिकाकर्ता जैसे कर्मचारी नियुक्ति वाले स्थान पर हमेशा तैनात रहना चाहते हैं। कोर्ट ने कहा कि राज्य कैडर का कोई भी कर्मचारी यह मानकर नहीं चल सकता कि उसे घर के आसपास सेवा करने का अधिकार प्राप्त है, जैसा कि आमतौर पर कर्मचारियों की आदत बन गई है। याचिकाकर्ता अगस्त 2019 से मंडी में ग्रामीण विकास विभाग में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत है। छोटे से अंतराल के बाद उसका तबादला भुंतर किया गया था। इस दौरान दौरान भी उसने मंडी में ही काम करना जारी रखा और तबादला आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा-दो स्थानों के बीच न्यूनतम दूरी 100 से 150 किलोमीटर तक होनी चाहिएl मुख्य सचिव को टिप्पणियों के संबंध में उत्तर प्रस्तुत करने को कहा, सुनवाई 16 अप्रैल को शिक्षकों की परीक्षा के मामले में आज भी जारी रहेगी सुनवाई। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में सीबीएसई पाठ्यक्रम से संबद्ध सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के लिए शिक्षकों की परीक्षा से जुड़े मामले में शुक्रवार को भी सुनवाई जारी रहेगी। अभी तक शिक्षकों को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। कोर्ट में शिक्षा विभाग की ओर से उत्तर दायर करने के बाद अंतरिम आदेश की मांग से जुड़े आवेदन पर सुनवाई चल रही है।

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