
Budget 2026: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने रविवार को पेश किए गए केंद्रीय बजट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि यह बजट हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य के लिए बेहद निराशाजनक है और इसमें न तो राज्य की आर्थिक जरूरतों को समझा गया है और न ही उसकी भौगोलिक व सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा गया है. नरेश चौहान ने कहा कि बजट में रिवेन्यू डिफिसिट ग्रांट को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है, जो हिमाचल प्रदेश के लिए सबसे बड़ा झटका है. उन्होंने बताया कि 15वें वित्त आयोग के तहत राज्य को करीब 40 हजार करोड़ रुपये की रिवेन्यू डिफिसिट ग्रांट मिली थी और प्रदेश सरकार को उम्मीद थी कि इस बार भी केंद्र सरकार हिमाचल जैसे विशेष श्रेणी के राज्य को यह सहायता जारी रखेगी. लेकिन बजट में इसके लिए कोई प्रावधान न होने से राज्य को सीधे तौर पर 40 हजार करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. नरेश चौहान ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से बागवानी और पर्यटन पर निर्भर है, जो राज्य की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं. इसके बावजूद केंद्रीय बजट में इन दोनों क्षेत्रों के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि सेब सहित अन्य कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) को लेकर भी बजट पूरी तरह खामोश रहा, जिससे प्रदेश के बागवानों में निराशा है.
किसानों, मजदूरों और युवाओं के लिए नहीं दिखा रोडमैप
प्रधान मीडिया सलाहकार ने कहा कि यह बजट किसानों, बागवानों, कृषि मजदूरों और युवाओं के कल्याण को लेकर कोई स्पष्ट दिशा नहीं दिखाता. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने हिमाचल जैसे सीमित संसाधनों वाले पहाड़ी राज्य की आवश्यकताओं की अनदेखी की है. नरेश चौहान ने कहा कि यह बजट केवल हिमाचल प्रदेश ही नहीं, बल्कि राज्यों के प्रति केंद्र सरकार की उदासीन सोच को दर्शाता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार बजट से उत्पन्न परिस्थितियों का गंभीरता से अध्ययन करेगी और हिमाचल के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखेगी।





