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हिमाचल में पंचायत प्रधानों का कार्यकाल आज होगा समाप्त: चुनावों की तैयारी शुरू

शिमला: हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में कल से एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव होने जा रहा है। अगर आपका कोई काम पंचायत प्रधान या उपप्रधान के स्तर पर रुका है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। प्रदेश की 3577 पंचायतों में चुनी हुई सरकार का कार्यकाल आज समाप्त हो रहा है। 1 फरवरी से गांवों की राजनीति के केंद्र रहे इन पदों पर सन्नाटा छा जाएगा। जिन दरवाजों पर फरियादियों की कतार लगती थी, वहां अब निर्वाचित प्रतिनिधियों का अधिकार नहीं रहेगा। सरकार की ओर से प्रशासकों की नियुक्ति को लेकर आज अधिसूचना जारी किए जाने की तैयारी है और एक फरवरी से पंचायतों की सभी शक्तियां प्रशासकों के पास होंगी।

इसी बीच पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन भी शुरू हो गया है। जिला उपायुक्त कार्यालय शिमला ने पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची जारी कर दी है। इससे पहले मसौदा सूची पर दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी थी, जिन्हें नियमों के तहत निपटाया गया।

जिला प्रशासन के अनुसार जिन नागरिकों के नाम पंचायत मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं, उनके लिए अब भी अवसर खुला है। ऐसे लोग पंचायत सचिव या खंड विकास अधिकारी कार्यालय में आवेदन कर अपना नाम दर्ज करवा सकते हैं। पंचायत क्षेत्रों में मतदाता पंजीकरण के लिए दो रुपये शुल्क रखा गया है, जबकि शहरी निकायों में यह शुल्क 50 रुपये निर्धारित है। चुनाव कार्यक्रम जारी होने तक मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया जारी रहेगी। राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में कुल 3577 पंचायतें हैं और पंचायत क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या 55 लाख से अधिक है। नए मतदाता जुड़ने से यह संख्या और बढ़ सकती है। इसके अलावा प्रदेश की 31 पंचायतों का पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन भी किया जा रहा है। इन पंचायतों को मंजूरी मिलने के बाद सार्वजनिक रूप से सूची जारी की जाएगी और लोगों से 15 दिन के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे। पंचायत चुनाव को लेकर मामला फिलहाल हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। अदालत ने राज्य में 30 अप्रैल तक पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग को 28 फरवरी को अदालत में अपना जवाब दाखिल करना है। आयोग पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि नई पंचायतों के गठन को लेकर उसे कोई आपत्ति नहीं है। हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज एक्ट 1994 (73वें संवैधानिक संशोधन के तहत) लागू होने के बाद यह एक बड़ी घटना है जब एक साथ पूरे प्रदेश की 3577 पंचायतों की कमान निर्वाचित प्रतिनिधियों से छिनकर अधिकारियों या कमेटियों के पास जाएगी। इससे पहले कोविड काल में लाहौल-स्पीति और पांगी में चुनाव टलने पर वहां 3 सदस्यीय कमेटी से काम चलाया गया था, लेकिन अब यह स्थिति पूरे प्रदेश में बनने जा रही है।

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