हिमाचल प्रदेश में भूमि संबंधी नियमों को सरल बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति देने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। शीतकालीन सत्र के दौरान राज्य सरकार ने धारा 118 में व्यापक संशोधनों के प्रस्ताव के साथ हिमाचल प्रदेश भू-अभिधृति एवं भूमि सुधार (संशोधन) विधेयक 2025 विधानसभा में पेश किया। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि इन संशोधनों का उद्देश्य राज्य में निवेश, छोटे व्यवसाय, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है, जबकि धारा 118 की मूल भावना—स्थानीय कृषकों की भूमि की सुरक्षा—ज्यों की त्यों बरकरार रहेगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में भवन लीज पर देने के लिए अब धारा 118 की अनुमति आवश्यक नहीं
विधेयक के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 10 वर्ष तक व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भवन या उसके हिस्से को लीज पर देने को अब धारा 118 से बाहर रखा जाएगा। इसका अर्थ यह है कि कोई भी गैर-कृषक अब गाँवों में दुकान, छोटा कार्यालय, स्टार्टअप स्पेस या आवासीय भवन का हिस्सा व्यावसायिक उपयोग के लिए बिना अनुमति लीज पर ले सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नए अवसर पैदा होंगे।
सरकार और सरकारी कंपनियों द्वारा अधिग्रहित भूमि पर स्पष्ट छूट
118(2)(ई) में संशोधन कर यह स्पष्ट किया गया है कि राज्य/केंद्र सरकारों, सरकारी कंपनियों और वैधानिक निकायों द्वारा भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत ली गई भूमि को धारा 118 की पाबंदियों से पूरी तरह छूट मिलेगी।
पहले यह प्रावधान अस्पष्ट था, जिससे कई परियोजनाओं में जटिलताएँ पैदा होती थीं। संपूर्ण कृषक सदस्यों वाली सहकारी समितियों को भूमि खरीदने की अनुमति
विधेयक में यह भी प्रावधान है कि—
- केवल कृषक सदस्यों वाली सहकारी समितियां भूमि खरीद सकेंगी
- समिति को हर वर्ष रजिस्ट्रार को यह प्रमाणित करना होगा कि किसी गैर-कृषक को सदस्य नहीं बनाया गया
- यदि नियम का उल्लंघन होता है, तो समिति की खरीदी गई भूमि राज्य सरकार में निशुल्क निहित हो जाएगी
- सरकार का कहना है कि प्रदेश में लगभग 20 लाख लोग सहकारी आंदोलन से जुड़े हैं, इसलिए यह संशोधन कृषि आधारित आर्थिक गतिविधियों को बड़ी ताकत देगा।
- हिमुडा/टीसीपी से खरीदी गई संपत्तियों पर छूट अब उत्तराधिकारियों को भी
- अब तक यह छूट केवल पहले खरीदार को मिलती थी कि HIMUDA या TCP योजनाओं से खरीदी गई संपत्तियों पर धारा 118 लागू नहीं होगी।
- नए संशोधन में यह सुविधा आगे के खरीदारों को भी दी जाएगी।
- हालांकि उनके लिए स्टांप ड्यूटी वही लागू रहेगी, जो सामान्यतः धारा 118 अनुमति प्राप्त गैर-कृषकों पर लागू होती है।
रेरा-पंजीकृत परियोजनाओं से गैर-कृषकों को घर खरीदने पर छूट
एक नया प्रावधान जोड़ते हुए कहा गया है कि यदि कोई गैर-कृषक रेरा-पंजीकृत प्रोजेक्ट से 500 वर्गमीटर तक का तैयार फ्लैट/भवन अपने निजी आवासीय उपयोग के लिए खरीदता है, तो उसे धारा 118 की अनुमति नहीं लेनी होगी। यह छूट आगे आने वाले खरीदारों पर भी लागू होगी।
भूमि उपयोग के लिए समयसीमा—3 वर्ष + 5 वर्ष तक विस्तार
धारा 118 अनुमति लेकर भूमि खरीदने वाले गैर-कृषकों के लिए—
- निर्धारित उद्देश्य के लिए 3 वर्ष के भीतर भूमि उपयोग अनिवार्य है
- सरकार 2 वर्ष की अतिरिक्त अवधि, तथा
- उसके बाद एक-एक वर्ष की वृद्धि के साथ कुल 5 वर्ष तक विस्तार दे सकेगी
- विस्तार के दौरान निर्धारित भूमि मूल्य के अधिकतम प्रतिशत तक पेनल्टी लगाई जाएगी।
- समयसीमा का पालन न करने या उद्देश्य बदलने पर भूमि राज्य सरकार में निशुल्क निहित कर दी जाएगी।
| प्रावधान | नया नियम | पूर्व स्थिति |
|---|---|---|
| ग्रामीण क्षेत्रों में भवन लीज | 10 वर्ष तक व्यावसायिक उपयोग के लिए लीज पर देने हेतु धारा 118 अनुमति आवश्यक नहीं | अनुमति लेना अनिवार्य |
| सरकार/सरकारी कंपनियों द्वारा अधिग्रहित भूमि | धारा 118 से पूर्ण छूट, स्पष्ट प्रावधान | नियम अस्पष्ट था |
| कृषक सदस्यों वाली सहकारी समितियां | भूमि खरीदने की अनुमति; गैर-कृषक सदस्य बनाने पर भूमि राज्य में निहित | स्पष्ट प्रावधान नहीं |
| HIMUDA/ TCP संपत्तियाँ | धारा 118 से छूट सभी आगे के खरीदारों को भी | केवल पहले खरीदार को छूट |
| रेरा-पंजीकृत परियोजनाओं से गैर-कृषकों की खरीद | 500 वर्गमीटर तक आवासीय उपयोग पर धारा 118 अनुमति नहीं | कोई छूट नहीं |
| भूमि उपयोग समयसीमा | 3 वर्ष अनिवार्य + 5 वर्ष तक विस्तार, पेनल्टी सहित | विस्तार का कोई प्रावधान नहीं |
| नियम उल्लंघन | भूमि राज्य सरकार में निहित | सीमित कार्रवाई |
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि विधानसभा में धारा-118 को लेकर विधेयक लाया गया है। इसमें ज्यादा छेड़छाड़ नहीं की गई है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने भूमि खरीदी है और 5 वर्ष में 70 फीसदी कार्य हुआ है, इसके बाद उसमें प्रावधान नहीं है कि एक साल की एक्सटेंशन दी जाए। एक्सटेंशन देने की पावर सरकार के पास लाने के लिए लिए विधेयक लाया गया है। इसमें जिसने भूमि खरीदी है, उसको जुर्माना लगाकर 5 वर्ष की जगह 1 या 2 साल की एक्सटेंशन दी जा सकेगी।





