
हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह की चतुर्थी तिथि को प्रतिवर्ष करवा चौथ (Karvachauth 2025) का व्रत रखा जाता है. यह व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र की कामना और वैवाहिक जीवन में खुशहाली के लिए बड़े श्रद्धा‑भाव से मनाया जाता है. इस दिन महिलाएं निर्जल व्रत रखती हैं और शाम के समय चंद्र दर्शन करके जल ग्रहण करती हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए यह व्रत रखा था, वहीं महाभारत में द्रौपदी ने पांडवों के लिए करवा चौथ का व्रत किया था. ऐसा माना जाता है कि इस व्रत से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
करवाचौथ पर पूजा का शुभ मुहूर्त
ज्योतिष पंडित कल्कि राम ने बताया, पंचांग के अनुसार कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर की रात्रि 10:55 से शुरू होकर 10 अक्टूबर शाम 7:39 तक रहेगी. पूजा का पहला शुभ मूहर्त 5 बजकर 57 मिनट से लेकर 7 बजकर 11 मिनट तक जबकि दूसरा 9 बजकर 2 मिनट से लेकर 10 बजकर 35 मिनट तक रहेगा. इस दिन चंद्रोदय रात्रि 8:03 पर होगा. 9 अक्टूबर को कृतिका नक्षत्र रात्रि 8:00 से शुरू होकर 10 अक्टूबर 5:32 तक रहेगा. इसके बाद रोहिणी नक्षत्र रहेगा जो 11 अक्टूबर को सुबह 3:27 तक जारी रहेगा।
करवा चौथ 2025 पूजा विधि (Karwa Chauth 2025 Puja Vidhi)
करवा चौथ के दिन व्रती महिलाओं को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाना चाहिए। इसके बाद सरगी का सेवन करें, जो कि इस व्रत की शुरुआत मानी जाती है। सरगी के बाद देवी-देवताओं का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। करवा चौथ की मुख्य पूजा शाम के समय की जाती है। पूजा के लिए सबसे पहले एक चौकी पर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। साथ ही एक करवा का चित्र भी रखें। पूजा की शुरुआत भगवान शिव की आराधना से करें। उन्हें सफेद चंदन, फूल, माला और भोग अर्पित करें। इसके बाद माता पार्वती को सिंदूर, रोली, कुमकुम, चुनरी और सोलह श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें। गणेश जी की विधिवत पूजा करें। फिर घी का दीपक जलाएं, धूप दें, और करवा चौथ की व्रत कथा सुनें या पढ़ें। इसके बाद एक टोंटीदार करवा (मिट्टी या पीतल का) लें। उसमें गेहूं, चावल, मिठाई और एक सिक्का डालें। करवा को ढक्कन से बंद कर दें और ऊपर गेहूं या चावल रखें। करवा की टोंटी में कांस (धातु) की सींक लगा दें। अब इस करवे की पूरी श्रद्धा और विधि के साथ पूजा करें। पूजा पूर्ण होने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का पारण करें।
करवा चौथ व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक दृष्टि से करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से लेकर रात्रि में चंद्रोदय तक रखा जाता है. इस दिन महिलाएं माता करवा की पूजा अर्चना करती हैं और शुभ मुहूर्त में व्रत का पालन करती हैं. ज्योतिष पंडित बताते हैं कि करवा चौथ के दिन शुभ मुहूर्त में पूजा‑पाठ करने से व्रत का प्रभाव अधिक फलदायक होता है. इस दिन व्रत का प्रभाव सिद्धि योग के संयोग से विशेष रूप से माना जाता है. वहीं, व्यतिपात योग अशुभ प्रभाव वाला होता है, जिससे बचने के लिए 10 अक्टूबर की शाम 5:42 से पहले पूजन का विधान पूरा करना होगा. चंद्रोदय काल में सिर्फ चंद्र पूजन और जल ग्रहण का विधान रखना चाहिए।
करवा माता की आरती (Karwa Chauth Mata Ki Aarti Lyrics)
ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया.. ओम जय करवा मैया।
सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी।
यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी.. ओम जय करवा मैया।
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती।
दीर्घायु पति होवे , दुख सारे हरती.. ओम जय करवा मैया।
होए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावे।
गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे.. ओम जय करवा मैया।
करवा मैया की आरती, व्रत कर जो गावे।
व्रत हो जाता पूरन, सब विधि सुख पावे..ओम जय करवा मैया।





