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भाई को बचाने के लिए तेंदुए से भिड़ी शिल्पा, मिला राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार

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बिलासपुर: हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले की शिल्पा शर्मा ने वह कर दिखाया था, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है। महज 14 साल की उम्र में उन्होंने अपने छोटे भाई को आदमखोर तेंदुए के जबड़े से बचाकर असाधारण साहस का परिचय दिया। खास बात है कि आज अंशुल का जन्म हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में आज के दिन ही हुआ था। शिल्पा की इस बहादुरी के लिए भारत सरकार ने उन्हें राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया। शिल्पा राकेश शर्मा व सरला की बड़ी बेटी हैं। राकेश शर्मा हिम बुनकर सहकारी सभा में कर्मचारी है। उन दिनों वे कुल्लू में नौकरी पर थे।यह घटना 27 अक्तूबर, 2012 की है। बिलासपुर की भराड़ी उपतहसील की भपराल पंचायत के गांव बडौन निवासी शिल्पा शर्मा, उस समय नौवीं कक्षा की छात्रा थीं, जबकि उनका छोटा भाई अंशुल छठी कक्षा में पढ़ता था। दोनों रोजाना चार किलोमीटर दूर स्थित निजी स्कूल भटेड़ पैदल जाया करते थे। उस दिन जब भाई-बहन सुनसान रास्ते से स्कूल जा रहे थे, अचानक एक तेंदुआ झाड़ियों से निकलकर अंशुल पर टूट पड़ा और उसे घसीटकर ले जाने लगा। शिल्पा ने यह दृश्य देखा तो एक पल के लिए वो सहम गई, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वह तेंदुए की ओर दौड़ीं और अपने बैग से उस पर हमला कर जोर-जोर से चिल्लाने लगीं। शिल्पा की आवाज सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर पहुंचे। जिसके बाद तेंदुआ अंशुल को छोड़कर भाग निकला। हालांकि इस दौरान अंशुल गंभीर रूप से घायल हो गया था और कई दिनों तक उसका अस्पताल में इलाज चला, लेकिन बहन की हिम्मत के आगे उसकी जान बच गई। जिसके बाद से शिल्पा के साहस की खबर पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई। घुमारवीं के तत्कालीन विधायक राजेश धर्माणी ने शिल्पा का नाम बाल वीरता पुरस्कार के लिए प्रस्तावित किया और तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने उन्हें राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया। इसके बाद भी शिल्पा को कई मंचों पर बहादुरी पुरस्कार मिलते रहे। वर्तमान में शिल्पा कांगड़ा से बी.फार्मा की पढ़ाई पूरी कर नौकरी की तैयारी कर रही हैं, जबकि अंशुल भी अपने करियर की तैयारी में जुटा है। खास बात यह है कि शिल्पा की इस बहादुरी की कहानी आज हिमाचल प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में बच्चों को पढ़ाई जाती है।

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