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असंसदीय और आपत्तिजनक शब्दों के मुद्दे पर विधानसभा में भारी हंगामा…

Himachal Assembly Session : हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को असंसदीय और आपत्तिजनक शब्दों के प्रयोग को लेकर भारी हंगामा हुआ। यह हंगामा उस वक्त आरंभ हुआ, जब भाजपा के विपिन सिंह परमार ने राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी द्वारा नेता प्रतिपक्ष को लेकर आपत्तिजनक शब्द प्रयोग करने का मामला उठाया। इस दौरान विपिन सिंह परमार और जगत सिंह नेगी में तीखी नोक-झोंक हुई जो बाद में नारेबाजी में तब्दील हो गई। इस बीच, सदन में दोनों पक्षों के सदस्य अपनी-अपनी सीटों पर खड़े हो गए और नारेबाजी करने लगे, जिस पर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया ने सदन की कार्यवाही तय समय से पहले भोजनावकाश के लिए स्थगित कर दी। विपिन सिंह परमार ने सत्ता पक्ष पर आरोप लगाया कि वह आसन को निर्देश दे रहे हैं, जो गलत है। इससे पूर्व, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि नियम 54 के तहत विधानसभा में प्रश्न पूछने का तरीका तय है। यदि प्रश्न इस तरीके से पूछा जाता है तो कार्यवाही का हिस्सा होगा, अन्यथा नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि विधायकों से शब्द विशेष बोलने का अधिकार नहीं छीना जाना चाहिए। नेगी ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि भाजपा पर लगे कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करवाएं। इस बीच, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उद्योगों को लेकर दिए जवाब के दौरान विशुद्ध राजनीतिक बात कही, जो बात से संबंधित नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि सत्तापक्ष हर बार भाजपा पर हिमाचल को बेचने का आरोप लगाता रहा है जो गलत है और कार्यवाही का हिस्सा नहीं होना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष यह भी कहा कि औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने के लिए कई राज्यों में सरकारों ने आकर्षित पैकेज दिए हैं। इसी दौरान, विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने व्यवस्था दी कि जो शब्द सदन का माहौल खराब करते हैं, वह कार्यवाही का हिस्सा नहीं होंगे। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि वह सदन की कार्यवाही को नियमों के अनुरूप ही चलाएंगे और इसके लिए सदन के दोनों पक्षों का सहयोग चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष ने बीते रोज पेखुबेला पर हुई चर्चा का हवाला देते हुए कहा कि यदि चर्चा विषय वस्तु से हुई होगी तो वह चर्चा कार्यवाही का हिस्सा नहीं होगी।

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