नाहन: डॉ. वाई.एस. परमार स्नातकोत्तर महाविद्यालय नाहन की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाइयों द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष आवासीय शिविर के अंतर्गत शनिवार को स्वयंसेवकों ने गोद लिए गए दो गांवों सैन की सेर और चबाहं पंचायतों में सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण किया। इस अभियान में 90 स्वयंसेवकों ने भाग लिया, जिन्हें 12-12 के समूहों में विभाजित किया गया। यह सर्वेक्षण एनएसएस जिला नोडल अधिकारी प्रो. पंकज चांडक और कार्यक्रम अधिकारी प्रो. लक्षिता ठाकुर के नेतृत्व में संपन्न हुआ। सर्वेक्षण के दौरान ग्राम प्रधान श्रीमती रेखा देवी, उपप्रधान सतेंद्र सिंह और सोमदत्त भी उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि स्वयंसेवकों ने सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जमीनी हकीकत को परखा और ग्रामीणों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की। इस सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि गांव के लोग अब भी खड्डों से पेयजल आपूर्ति पर निर्भर हैं, जिससे उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, स्वयंसेवकों ने डिजिटल जागरूकता और साइबर सुरक्षा पर भी ग्रामीणों को शिक्षित किया। इस दौरान, सैन की सेर गांव के एक व्यक्ति के साथ ₹90,000 की साइबर ठगी का मामला सामने आया, जिससे सीख लेते हुए स्वयंसेवकों ने ग्रामीणों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के उपाय बताए।
डॉ. पंकज चांडक ने बताया कि इस विशेष सेवा अभियान के तहत नाहन क्षेत्र के 8 किलोमीटर के दायरे में स्थित पांच गांवों को गोद लिया गया है। इन गांवों में सामाजिक-आर्थिक सुधार और सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सेवा अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में, शिविर के सायंकालीन सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है। जिससे ग्रामीणों और स्वयंसेवकों के बीच परस्पर संवाद और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिल रहा है।इस सर्वेक्षण से प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर ग्राम विकास से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव तैयार किए जाएंगे और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाए जाएंगे, जिससे सरकार की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।





