शिमला: हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार अपने ही अंतर्विरोधों में उलझकर बिखर रही है और अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए भाजपा पर झूठे आरोप लगाने का प्रयास कर रही है। प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल के दौरे से पहले ही कांग्रेस विधायकों और वरिष्ठ नेताओं में असंतोष खुलकर सामने आ गया है। भाजपा मुख्य प्रवक्ता राकेश जमवाल ने कहा कि कांग्रेस के विधायक सुरेश कुमार का बयान स्वयं यह प्रमाणित करता है कि सरकार में संतुलन की कमी है और कुछ ज़िलों को पूरी तरह नज़रअंदाज किया गया है। अगर सरकार बनने के दो वर्ष बाद भी कांग्रेस के अपने विधायक यह मान रहे हैं कि कैबिनेट विस्तार में भेदभाव हुआ है और अस्थिरता के प्रयास हुए हैं, तो इससे साफ़ है कि कांग्रेस का असली क्षत्रु स्वयं कांग्रेस ही है। विधायक सुरेश कुमार का बयान कांग्रेस सरकार की अंदरूनी गुटबाजी और सत्ता संघर्ष को उजागर करता है। भाजपा को दोष देने की बजाय कांग्रेस को अपनी असफ़लताओं पर ध्यान देना चाहिए।कैबिनेट विस्तार में भारी असंतुलन – कुछ ज़िलों को अधिक प्रतिनिधित्व, तो कई जिलों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया। बगावत की आग बुझने के बजाय और भड़क रही है – छह विधायकों को उकसाने की बात स्वयं कांग्रेस विधायक स्वीकार कर रहे हैं।कांग्रेस सरकार का असली चेहरा सामने आ गया है – पार्टी के अंदर अब यह तय करने के लिए कमेटी बनाने की बात हो रही है कि कौन “वफादार” है और कौन “गद्दार”। राकेश जमवाल ने कहा कि पिछले साल मार्च में जब कांग्रेस के छह विधायकों ने सरकार के विरुद्ध बगावत की थी, तब कांग्रेस ने भाजपा को दोषी ठहराया था। लेकिन अब जब कांग्रेस के अपने विधायक ही पार्टी नेतृत्व पर प्रश्न उठा रहे हैं, तो इससे स्पष्ट हो जाता है कि कांग्रेस खुद अपने अंतर्विरोधों के कारण अस्थिर हो रही है।प्रदेश में कांग्रेस सरकार पूरी तरह विफ़ल साबित हुई है। जनता को राहत देने और विकास करने के बजाय कांग्रेस सरकार आपसी कलह और कुर्सी बचाने के संघर्ष में उलझी हुई है। यह सरकार पूर्णतया असफ़ल हो चुकी है। जनता कांग्रेस की सच्चाई समझ चुकी है। अब कांग्रेस को अपनी विदाई की तैयारी कर लेनी चाहिए। कांग्रेस को अब भाजपा पर झूठे आरोप लगाने के बजाय आत्मविश्लेषण करना चाहिए और यह स्वीकार करना चाहिए कि उनकी सरकार जनता की अपेक्षाओं पर पूरी तरह विफ़ल रही है।





