पैराशूट से पहली सफल छलांग 22 अक्टूबर, 1797 को फ़्रांस के आंद्रे-जैक्स गार्नेरिन ने पेरिस के पार्क मोंसेउ से लगाई थी. उन्होंने हॉट एयर बैलून से लगभग 3,000 फ़ीट (910 मीटर) नीचे उतरने के लिए सिल्क पैराशूट का इस्तेमाल किया था. माना जाता है कि गार्नेरिन पैराशूट का सफल इस्तेमाल करने वाले पहले व्यक्ति थे.
इससे पहलेएक फ्रांसीसी शख्स लुईस-सेबेस्टियन लेनोर्मंड ने दो छतरियों से एक प्रकार का पैराशूट बनाया था और 1783 में एक पेड़ से छलांग लगाई थी, लेकिन आंद्रे-जैक्स गार्नेरिन पहले व्यक्ति थे जिन्होंने ऐसे पैराशूट का डिजाइन तैयार किया और उसका परीक्षण किया,जिसके सहारे अधिक ऊंचाई से सफलतापूर्वक छलांग लगाकर नीचे उतरा जा सकता था। बैलून दुर्घटना में ही हो गई थी गार्नेरिन की मौत
1799 में, गार्नेरिन की पत्नी, जीन-जेनेविव, पहली महिला पैराशूटिस्ट बनीं. 1802 में, गार्नेरिन ने इंग्लैंड में एक प्रदर्शनी के दौरान 8,000 फीट से एक शानदार छलांग लगाई. 1823 में एक नए पैराशूट का परीक्षण करने की तैयारी करते समय एक बैलून दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई।
पैराशूट की कल्पना लिओनार्दो द विंची ने की थी
पंद्रहवीं सदी में सबसे पहले लिओनार्दो दा विंची ने पैराशूट की कल्पना करते हुए इसका रेखाचित्र तैयार किया था. दा विंची की इस डिजाइन से प्रेरणा लेकर फॉस्ट ब्रांसिस ने वर्ष 1617 में एक सख्त फ्रेम वाला पैराशूट पहनकर वेनिस टॉवर से छलांग लगाई थी.ये असफल रहा था. इसके बाद ऐसे ही कई प्रयास किये गए. 1797 में जाकर सबसे सफल पैराशूट जंप आंद्रे गार्नेरिन ने पहली बार किया।
प्रमुख घटनाएं
22 अक्टूबर 2008 में भारत ने अपना पहला मानवरहित चंद्र मिशन चंद्रयान-1 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया. इस मिशन से चंद्रमा पर पानी होने का पता लगा।
22 अक्टूबर 1836 में सेन हाउटन टेक्सास गणराज्य के पहले राष्ट्रपति बने।
22 अक्टूबर 1878 में सेलफ़ोर्ट में पहली बार रगबी मैच ब्राउटन और स्वींटन के बीच खेला गया।
पहला सफल पैराशूट जंप
22 अक्टूबर, 1797 को, गार्नेरिन ने पैराशूट को हाइड्रोजन बैलून से जोड़ा और 3,200 फीट की ऊंचाई पर चढ़ गया. फिर उससे लगे टोकरी में चढ़ गया और पैराशूट को बैलून से अलग कर दिया. पहली बार गार्नेरिन का पैराशूट से नीचे उतरने में बेतहाशा हिल गया, लेकिन वह बैलून के टेकऑफ़ साइट से आधे मील की दूरी पर हिलते हुए ही सही, लेकिन बिना किसी चोट के उतरा. गार्नेरिन ने कंपन कम करने के इरादे से इसमें कुछ और सुधार किया और इस तरह पहला छिद्रित पैराशूट अस्तित्व में आया.





