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हिमाचल में सूखे ने 20 साल का रिकॉर्ड तोड़ा, बिन बारिश सूखी बीती किसानों की इस बार लोहड़ी…

हमीरपुर : बिना बारिश के किसानों की लोहड़ी भी सूखी ही गुजर गई। चेहरे मायूस हैं। खेतों में गेहूं की फसल सूख रही है। गेहूं के हरे पत्ते पीले पड़ने लगे हैं। आमतौर पर यह लोहड़ी या लोहड़ी पर्व के नजदीक किसानों को बारिश की उम्मीद रहती है, लेकिन लंबे अरसे के बाद लोहड़ी तक मेघ नहीं बरसे हैं। किसानों को कड़ी मेहनत से उगाई गेहूं की फसल मुरझाने का खतरा पैदा हो गया है। ऐसे में पशुधन के लिए चारे की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो जाएगा। किसान अपने खेतों में गेहूं की फसल को सूखता हुआ देखकर काफी निराश हैं। प्रार्थना कर रहे हैं कि बारिश हो जाए और उनके खेतों में हरियाली दोबारा छा जाए। खेतों में इस बार गेहूं की फसल पूरी तरह से पीली हो गई है। जिला हमीरपुर के किसानों सुशील कुमार, महेंद्र कुमार, संजय कुमार,अश्वनी कुमार, पवन शर्मा, मनोहर लाल, सुशील अत्री, कमल कुमार और विजय कुमार का कहना है कि बारिश न होने से गेहूं की फसल सूख रही है। ऐसा इससे पहले एक बार हुआ था, जब पूरी सर्दियों के मौसम में कोई भी बारिश ही नहीं हुई थी। किसानों का कहना है कि फसल सूखने पर प्रदेश और केंद्र सरकार को किसानों के लिए मुआवजे का प्रावधान करना चाहिए। जिन किसानों ने अपनी गेहूं की फसल का बीमा कंपनी से करवा रखा है उन्हें तो मुआवजा मिल जाएगा लेकिन जिन्होंने बीमा नहीं करवाया हुआ है, उन किसानों को इसका लाभ कैसे मिल पाएगा। उन्होंने सरकार से जिला हमीरपुर को सूखाग्रस्त घोषित करके किसानों को मुआवजा देने की गुहार लगाई है ताकि किसान आगामी फसलों के लिए बीज का प्रावधान कर सकें। मौसम विभाग के निदेशक सुरेंद्र सिंह की माने तो इस बार सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ कमजोर पड़ रहे हैं। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से इस तरह की घटनाएं अक्सर देखी जाती हैं. सुरेंद्र पाल ने बताया कि 2004 के बाद प्रदेश में इस तरह के हालात बने हुए हैं. 2007 में जनवरी माह में माइन्स 99 फ़ीसदी बारिश हुई थी, लेकिन इस मर्तबा जनवरी माह में अभी तक न बर्फ पड़ी न ही बारिश हुई है. सुरेंद्र पाल ने बताया कि इस महीने पूरे जनवरी तक कोई भी बड़ा पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना नहीं दिख रही. लिहाजा अभी बारिश बर्फबारी के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा. सुरेंद्र पॉल ने बतया कि जनवरी के महीने में हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी होने की बहुत कम संभावना है. आने वाले समय में केवल हिमाचल प्रदेश के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में देखने को मिलेगी. राजधानी शिमला में बर्फबारी की उम्मीद ना के बराबर हो सकती है. ऐसे में जो पर्यटक शिमला बर्फबारी को देखने के लिए आ रहे हैं उन्हें निराशा ही होना पड़ेगा. अगर पहाड़ों में बर्फबारी या बारिश नहीं होगी तो कोहरे की समस्या से निजात नहीं मिल पाएगी । लेकिन वर्तमान में स्थिति यही बनी हुई है कि कोई भी स्ट्रांग वेस्टर्न डिस्टरबेंस हिमाचल प्रदेश में एक्टिव नहीं हो रहा है जिसकी वजह से इन तमाम समस्याओं से राहत मिल सकती.

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