Home » Uncategorized » विश्वासघात से गिराया गया राम मंदिर, बाबर कई बार आया था अयोध्या, काटे गए थे पुजारियों के सिर, 80 महीने, 47 निर्णय और 31 हजार करोड़ से बदल गई श्री राम की नगरी अयोध्या की तस्वीर….

विश्वासघात से गिराया गया राम मंदिर, बाबर कई बार आया था अयोध्या, काटे गए थे पुजारियों के सिर, 80 महीने, 47 निर्णय और 31 हजार करोड़ से बदल गई श्री राम की नगरी अयोध्या की तस्वीर….

अयोध्या : नाम से ही काफी कुछ स्पष्ट होने लगता है। अयोध्या भी अपने नाम से स्वयं में निहित अपार संभावनाओं एवं सभी प्रकार के युद्ध से ऊपर अपनी अखंडता, अमरता एवं अहिंसा व्यक्त करती है। इस विरासत के अनुरूप यह न केवल रामानुरागियों, बल्कि मानव मात्र की आस्था के केंद्र में रही है और यहां से सभी को राम कृपा का प्रसाद मिलता रहा। यद्यपि अयोध्या के इस अप्रतिम अवदान का दुरुपयोग भी हुआ। स्वयं रामजन्मभूमि इस विडंबना की परिचायक है। विश्वास न हो तो एक मार्च 1528 ई. को रामजन्मभूमि पर निर्मित मंदिर तोड़े जाने के पूर्व के घटनाक्रम पर गौर करें। रामजन्मभूमि के इतिहास पर पहली प्रामाणिक कृति छह दशक पूर्व प्रस्तुत करने का श्रेय रामगोपाल पांडेय ‘शरद’ को जाता है।इसके अनुसार ‘भारत पर मुगलों का अधिकार हो गया और सम्राट बाबर दिल्ली के राज सिंहासन पर बैठा। उस समय रामजन्मभूमि महात्मा श्यामानंद के अधिकार में थी। वह उच्चकोटि के सिद्ध महात्मा थे। उनके हृदय में ऊंच-नीच का भेद-भाव नहीं था। उनके समय में ख्वाजा कजल अब्बास मूसा आशिकाना यहां आए और महात्मा श्यामानंद के साधक शिष्य हो गए। उनके सत्संग से ख्वाजा साहब को रामजन्मभूमि का प्रभाव विदित हुआ और जन्मभूमि पर ख्वाजा की अपार श्रद्धा हो गई। एक दिन ख्वाजा ने श्यामानंद से प्रार्थना की, कि अपनी सिद्ध का थोड़ा सा प्रसाद इस गुलाम को भी बख्श दीजिए। श्यामानंद ने कहा कि हिंदुओं के जितनी पवित्रता तुम रख नहीं सकते और यदि तुम्हें कहा जाय कि हिंदू धर्म स्वीकार लो, तो भी वह पवित्रता तुममें नहीं आ सकती, जो जन्म-जन्मांतरों के संस्कार से मनुष्य को प्राप्त होती है।

अतएव तुम इस्लाम धर्म के अनुसार अपने ही मंत्र ‘लाइलाह इल्लिल्लाह’ का नियमपूर्वक अनुष्ठान करो। ख्वाजा ने इस सुझाव को स्वीकार किया और इस मंत्र का अनुष्ठान कर महान सिद्धि प्राप्त की। इसी बीच में जलालशाह नामक एक दूसरा फकीर भी आ गया और ख्वाजा कजल की भांति स्वामी श्यामानंद का शिष्य बन कर रहने लगा।

जलालशाह को जब इस स्थान का महत्व विदित हुआ, तो उसे इस स्थान को खुर्द मक्का और सहस्रों नबियों का निवास स्थान सिद्ध करने की सनक सवार हुई । उसके प्रयत्न से लंबी-लंबी कब्रें बनवाई गईं। दिव्य-दैवी जिंदगी पाने के उद्देश्य से सुदूर देशों तक से मुसलमानों के शव यहां लाए जाने लगे। भगवान की पूरी कब्रों से पाट दी गई। जलालशाह ने एक दिन ख्वाजा कजल अब्बास से कहा कि इस मंदिर को तोड़ कर मस्जिद बनवानी होगी। इस पर ख्वाजा ने कहा कि अगर ऐसा हो गया, तो भारत में इस्लाम की जड़ जम जाएगी। फतेहपुर सीकरी में बाबर और राणा सांगा में घमासान युद्ध हुआ। इस युद्ध में बाबर राणा सांगा के हाथों से आहत होकर भाग निकला और अयोध्या आकर जलालशाह की शरण ली। जलालशाह ने उसे विजयी होने का आशीर्वाद दिया, उससे प्रभावित होकर बाबर पुनः फतेहपुर सीकरी पहुंचा और राणा सांगा पर विजय प्राप्त की।

जलालशाह से प्रभावित बाबर फिर अयोध्या आया। इस भेंट में जलालशाह ने बाबर को जन्मभूमि का राम मंदिर तोड़ कर मस्जिद बनाने के लिए बाध्य किया। बाबर यह काम अपने वजीर मीरबांकी खां के सुपुर्द करके दिल्ली चला गया।

पुजारियों के सिर काटे गए

बाबा श्यामानंद अपने साधक शिष्यों की करतूत पर पछताते हुए रामजन्मभूमि पर स्थापित चल विग्रह सरयूजी में विसर्जित कर और दिव्य विग्रह को अपने साथ लेकर उत्तराखंड चले गए। पुजारियों ने मंदिर के द्वार पर खड़े होकर कहा कि पहले हम मर जाएंगे तब मंदिर के द्वार के भीतर कोई प्रवेश कर सकेगा। जलालशाह की आज्ञानुसार चारों पुजारियों का सिर काट लिया गया और तोपों की मार से मंदिर भूमिसात कर दिया गया’। मंदिर ध्वस्त किए जाने के बाद भी बाबर को इस स्थल की विरासत शिरोधार्य करनी पड़ी। शरद अपनी कृति में बताते हैं कि मंदिर की सामग्री से ही मस्जिद का निर्माण आरंभ हुआ। दिन भर में जितनी दीवार बनकर तैयार होती थी, शाम को वह अपने आप गिर पड़ती थी। महीनों तक यही तमाशा होता रहा। वजीर मीरबाकी हैरान था। दीवार के चारों और संगीनों का पहरा लगा दिया गया, मगर दीवार गिर जाने का क्रम अबाध गति से जारी रहा।

धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखने के बावजूद अरसे से उपेक्षित-तिरस्कृत अयोध्या के दिन यूं ही बहुरते नहीं दिख रहे हैं। भव्य-दिव्य-नव्य अयोध्या के सपने को साकार करने के लिए योगी सरकार ने 80 माह में 47 अहम निर्णय किए और खजाने से 31 हजार करोड़ रुपये खर्च करने में कहीं कोई हीला-हवाली नहीं होने दी। रामलला की नगरी में सभी योजनाओं और परियोजनाओं के कार्यों को मिशन मोड में सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 61 बार खुद ग्राउंड जीरो पर उतरे। भव्य-दिव्य-नव्य अयोध्या के सपने को साकार करने के लिए वैसे तो वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के साथ ही योगी आदित्यनाथ जुट गए थे, लेकिन सर्वोच्च अदालत के निर्णय के बाद भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण शुरू होने के साथ ही योगी सरकार इसमें पूरे संकल्प से जुट गई।

योगी सरकार ने रखा बजट का पूरा ध्यान

निर्णयों को अमली जामा पहनाने में कहीं कोई वित्तीय संकट न आए इसके लिए बजट का पूरा ध्यान रखा गया। अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि अब तक योगी सरकार खजाने से लगभग 31 हजार करोड़ रुपये अयोध्या को दे चुकी है। प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पहले चौतरफा राममय माहौल बनाने के लिए ही हाल में अनुपूरक बजट के माध्यम से 100 करोड़ रुपये दिए गए।

अब तक 61 बार अयोध्या आए सीएम योगी

पैसा देने के साथ ही उच्च गुणवत्ता का कार्य समय से सुनिश्चित करने के लिए योगी न केवल लखनऊ में बैठकें करते रहे बल्कि आए दिन अयोध्या भी पहुंचे। अब तक 61 बार अयोध्या जा चुके मुख्यमंत्री ने सैकड़ों छोटी-बड़ी परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण करने से लेकर अफसरों के साथ समीक्षा बैठकें की।

अयोध्या के लिए सीएम योगी के अहम फैसले

अयोध्या-फैजाबाद को मिलाकर अयोध्या नगर निगम का गठन-09 मई 2017 विद्युत व्यवस्था सुधारने को 220 केवी उपकेंद्र का निर्माण-22 मई 2018 अयोध्या बाईपास पर भव्य बस स्टेशन का निर्माण-19 जून 2018 फैजाबाद जिला व मंडल का नाम बदलकर अयोध्या करना-13 नवंबर 2018 अयोध्या में मेडिकल कॉलेज का निर्माण-19 जनवरी 2019 भजन संध्या स्थल, म्यूजियम, श्रीराम प्रतिमा का निर्माण-02 मार्च 2019 अयोध्या को स्मार्ट सिटी के तौर पर विकास करना-24 सितंबर 2019 दीपोत्सव मेले का प्रांतीयकरण करना-22 अक्टूबर 2019 हवाई पट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करना-25 जनवरी 2021 अयोध्या के आसपास के कई मार्गों को चार लेन बनाना-21 जुलाई 2021 श्रीराम जन्मभूमि मंदिर अयोध्या में मार्ग चौड़ीकरण-सुंदरीकरण-02 अगस्त 22 अयोध्या को मॉडल सोलर सिटी के रूप में विकसित करना-16 नवंबर 2022 अयोध्या नगर निगम के कार्यालय भवन का निर्माण-25 नवंबर 2022 अयोध्या में धर्मपथ के साथ कई और मार्गों का विस्तारीकरण-10 मार्च 2023 महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय की स्थापना-12 मई 2023 चार लेन के रामपथ का निर्माण एवं चौड़ीकरण-22 अगस्त 2023 अयोध्या को समग्र विकास योजना के तहत सीड कैपिटल-31 अक्टूबर 2023 उप्र श्री अयोध्या जी तीर्थ विकास परिषद का गठन-09 नवंबर 2023 भारतीय मंदिर वास्तुकला संग्रहालय की स्थापना-09 नवंबर 2023 अंतरराष्ट्रीय अयोध्या रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान बनाना-09 नवंबर 2023 मकर संक्रांति व बसंत पंचमी मेला का प्रांतीयकरण-09 नवंबर 2023

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