लाइव हिमाचल/सोलन: डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर एक क्लिक के जरिए किसी भी खबर, तस्वीर या वीडियो को फैलाना जितना आसान हुआ है, उतनी ही तेजी से फर्जी खबरों (Fake News) और भ्रामक सूचनाओं का प्रसार भी बढ़ा है। इस बढ़ती चुनौती को देखते हुए हिमाचल प्रदेश पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को आगे साझा (Share) करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें। बिना पुष्टि की गई सूचनाएं समाज में डर, तनाव और अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर सकती हैं।
केवल आधिकारिक और प्रमाणित स्रोतों पर ही करें विश्वास:
पुलिस ने सलाह दी है कि किसी भी संवेदनशील खबर को शेयर करने से पहले उसके स्रोत (Source) की जांच जरूर करें। विशेषकर सरकारी आदेश, मौसम की चेतावनी, पुलिस कार्रवाई, प्राकृतिक आपदा, सरकारी भर्ती व अन्य महत्वपूर्ण मामलों से जुड़ी जानकारियों की पुष्टि संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या नीले टिक वाले (Verified) सोशल मीडिया अकाउंट्स से ही करें।
पुलिस के अनुसार, केवल परिचित व्यक्ति द्वारा भेजे जाने या किसी पोस्ट के वायरल होने मात्र से उसे सच नहीं मान लेना चाहिए। फर्जी सूचनाएं अक्सर पुरानी तस्वीरों को नई घटना से जोड़कर, एडिट किए गए वीडियो या फर्जी स्क्रीनशॉट के जरिए फैलाई जाती हैं। इसलिए किसी भी मीडिया फाइल को आगे भेजने से पहले उसकी प्रामाणिकता को एक से अधिक विश्वसनीय स्रोतों से मिलाना बेहद जरूरी है।
अफवाह फैलाने वालों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई:
हिमाचल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी भ्रामक या झूठी सूचना से सार्वजनिक शांति, सुरक्षा में बाधा पहुंचती है अथवा लोगों में भय का माहौल बनता है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। डीजीपी अशोक तिवारी ने प्रदेश वासियों से एक जिम्मेदार ‘डिजिटल नागरिक’ बनने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी संदिग्ध मैसेज को बिना सोचे-समझे फॉरवर्ड करने के बजाय उसकी तथ्य-जांच (Fact-Check) करें और केवल प्रामाणिक व सत्यापित जानकारी ही दूसरों के साथ साझा करें।





