शिमला: हिमाचल ने पक्षी संरक्षण और नागरिक विज्ञान के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया। पहली बार प्रदेश के सभी 12 जिलों ने इस अभियान में भाग लेते हुए पक्षियों की 208 प्रजातियों और 146 ई-बर्ड चेकलिस्ट का रिकॉर्ड दर्ज किया। वर्ष 2024 में 166 प्रजातियां और 2025 में 183 प्रजातियां दर्ज हुई थीं। हिमालयन बर्ड काउंट 2026 और ग्लोबल बिग डे के आंकड़ों से यह खुलासा हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक कांगड़ा जिला 126 प्रजातियों के साथ सबसे आगे रहा, जबकि मंडी और किन्नौर जनभागीदारी के मामले में शीर्ष पर रहे। अभियान में विशेषज्ञों के साथ विद्यार्थी, वन अधिकारी, फोटोग्राफर और स्थानीय ग्रामीणों सहित 1500 से अधिक लोगों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने ई-बर्ड मोबाइल एप पर कम से कम 15 मिनट की चेकलिस्ट अपलोड कर पक्षियों का डाटा साझा किया। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह का डाटा भविष्य के वैज्ञानिक शोध और संरक्षण योजनाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गणना के दौरान हिमालयी क्षेत्रों में कई पक्षी प्रजातियों की सक्रिय प्रजनन गतिविधियां भी देखी गईं, जिसे विशेषज्ञों ने राज्य के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का सकारात्मक संकेत बताया। इन पक्षियों में ब्लू व्हिस्लिंग थ्रश , हिमालयन रूबीथ्रोट, व्हाइट-थ्रोटेड टिट, हिमालयन मोनाल, कोकलास फीजेंट, कालीज फीजेंट, इंडियन पीफाउल, हिमालयन आउल, ग्रे-क्राउन्ड गोल्डफिंच, कॉमन रोजफिंच आदि शामिल हैं। पीसीसीएफ (वन्यप्राणी) एवं चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन आर. लानुन सांगा ने कहा कि पक्षियों की बढ़ती गतिविधियां पर्यावरणीय संतुलन के लिए उत्साहजनक हैं। वहीं, बर्ड काउंट इंडिया के समन्वयक संतोष ठाकुर ने कहा कि पक्षियों का नियमित दस्तावेजीकरण पर्यावरणीय बदलावों को समझने के लिए बेहद जरूरी है। इससे जैव विविधता संरक्षण को नई मजबूती मिल रही है।





