शिमला: हाईकोर्ट ने हिमकेयर योजना में निजी अस्पतालों के लंबित बिलों के भुगतान को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि अगले दो सप्ताह के भीतर अस्पतालों के बिलों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाए, ताकि सही पाए गए बिलों का भुगतान किया जा सके।अदालत ने साफ किया कि बिलों के सत्यापन और भुगतान की यह प्रक्रिया राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की ओर से गठित एसआईटी की जांच से स्वतंत्र रहेगी।अदालत के पिछले आदेशों की अनुपालन करते हुए सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा, स्वास्थ्य सेवा निदेशक जितेंद्र सांजटा और विशेष सचिव (स्वास्थ्य) एवं सीईओ अश्विनी कुमार शर्मा व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। अदालत ने इन अधिकारियों के साथ सकारात्मक चर्चा की, इसके बाद लंबित भुगतानों को लेकर एक सर्वसम्मति बनी। अदालत को सूचित किया कि लंबित बिलों के वितरण के लिए वर्तमान में लगभग 17 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध है। अदालत ने प्रतिवादी केंद्र सरकार को पिछले आदेशों की पालन करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही राज्य सरकार को आयुष्मान भारत योजना के कार्यान्वयन से संबंधित समझौता ज्ञापन भी रिकॉर्ड पर रखने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 18 मई 2026 को होगी, इसमें कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही सितंबर 2024 से निजी अस्पतालों में हिमकेयर योजना का संचालन बंद कर दिया गया हो, लेकिन डायलिसिस की सुविधा अभी भी जारी है। डायलिसिस से संबंधित सभी लंबित बिलों की तुरंत जांच कर भुगतान जारी किया जाए।हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आपराधिक क्षेत्राधिकार को लेकर स्पष्ट किया है कि यदि किसी अपराध की कड़ियां अलग-अलग राज्यों से जुड़ी हों और अपराध का एक हिस्सा हिमाचल में घटित हुआ हो, तो यहां की अदालतों को मामले की सुनवाई करने का पूरा अधिकार है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने कुरुक्षेत्र की निवासी कुलजीत कौर की ओर से दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-1 ऊना के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें आरोपियों के खिलाफ धारा 120-बी, 384 और 506 के तहत आरोप तय किए गए थे। कोर्ट ने कहा कि भले ही दुष्कर्म की पहली घटना हरियाणा के कुरुक्षेत्र में हुई हो, लेकिन यदि उसके बाद पीड़िता को ब्लैकमेल करके पैसे की वसूली हिमाचल प्रदेश (जिला ऊना) के बैंक खातों के माध्यम से की गई है, तो यह एक निरंतर चलने वाला अपराध है। याचिकाकर्ता पर आरोप है कि उसने मुख्य आरोपी को अपने घर पर दुष्कर्म करने में सहायता प्रदान की और बाद में पीड़िता को डरा-धमकाकर 10 लाख रुपये नकद वसूले। कोर्ट ने माना कि चूंकि जबरन वसूली का प्रभाव और लेनदेन हिमाचल में हुआ, इसलिए ऊना की अदालत को मामले की सुनवाई का अधिकार है।





