शिमला: हिमाचल प्रदेश के दुर्गम जिला चंबा की चुराह विधानसभा से भाजपा विधायक हंसराज की मुश्किलें फिर बढ़ गई हैं. विधायक पर दर्ज पॉक्सो (POCSO) एक्ट मामले में पीड़िता ने विधायक की जमानत को हाईकोर्ट में चुनौती दी है. मामले में चंबा सेशन कोर्ट ने विधायक हंसराज को जमानत दे दी थी, जिस पर पीड़िता ने विधायक की जमानत के खिलाफ हिमाचल हाईकोर्ट में याचिका दायर की. सोमवार को इसी मामले में हिमाचल हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता ने याचिका से जुड़े ऑब्जेक्शन पर कंप्लायंस फाइल किया. इसी साल जनवरी महीने में मामला हिमाचल हाईकोर्ट पहुंचा था.
हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में मांगा जवाब
भाजपा विधायक हंसराज पर महिला पुलिस स्टेशन चंबा में पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज है. मामले में 27 नवंबर 2025 को चंबा सेशन कोर्ट से विधायक हंसराज को जमानत मिल गई थी. इसके बाद मामला जनवरी 2026 में हिमाचल हाईकोर्ट पहुंचा. 9 जनवरी को हिमाचल हाईकोर्ट में जस्टिस राकेश कैंथला की बैंच ने इस मामले पर सुनवाई की. मामले में स्टेट की ओर से पेश हुए एडिश्नल एडवोकेट जनरल जितेंद्र शर्मा ने अदालत से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय मांगा. इस पर जस्टिस राकेश कैंथला की अदालत ने स्टेट को चार हफ्तों में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा. साथ ही प्रतिवादी MLA हंसराज को नोटिस जारी करते हुए एक हफ्ते के भीतर जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के आदेश दिए हैं. मामला में स्टेट ऑफ हिमाचल प्रदेश, पुलिस अधीक्षक चंबा, SHO महिला पुलिस थाना चंबा और विधायक हंसराज को प्रतिवादी बनाया गया है. मामले में हाईकोर्ट की ओर से प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं. मामले में अगली सुनवाई के लिए फ़िलहाल कोई तारीख नहीं दी गई है। यह मामला साल 2024 से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। अगस्त 2024 में पीड़िता ने विधायक पर अश्लील चैट करने और दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर 16 अगस्त 2024 को चंबा महिला थाने में FIR दर्ज हुई। शुरुआत में कोर्ट में बयान देने के बाद पीड़िता अचानक अपने आरोपों से पलट गई थी। उसने सोशल मीडिया पर लाइव आकर इसे ‘गलतफहमी’ करार दिया था। अक्टूबर 2025 में फिर विवाद उठा। एक साल की चुप्पी के बाद पीड़िता ने वीडियो जारी कर रोते हुए आरोप लगाया कि उसका परिवार विधायक की वजह से बर्बाद हो गया है और उसे जान का खतरा है। नवंबर 2025 में पीड़िता के पिता ने सनसनीखेज खुलासा किया कि विधायक के करीबियों ने उनकी बेटी का अपहरण किया था और दबाव डालकर बयान बदलवाए थे। भाजपा विधायक हंसराज को 27 नवंबर 2025 को चंबा कोर्ट से नियमित जमानत मिली थी। पीड़िता का तर्क है कि यह जमानत गलत आधार पर दी गई है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। अब हाईकोर्ट यह तय करेगा कि विधायक की जमानत याचिका को एडमिशन मिलना चाहिए या नहीं। प्रशासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता जितेंद्र शर्मा ने पक्ष रखा। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई राज्य सरकार का जवाब आने के बाद होगी।





