
लाइव हिमाचल/अशोक वर्धन/सोलन: सोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर प्रमुख जन संगोष्ठी का आयोजन कोठों के भाषा संस्कृति सभागार में किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह- सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे। इस कार्यक्रम में डॉ. कृष्ण गोपाल ने संघ की सौ वर्षों की यात्रा के साथ साथ सामाजिक परिवर्तन के पंच प्रणों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा भारत सदैव विश्व में प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी रहा। हमारा देश ज्ञान में, विज्ञान में और विश्व के कल्याण में तत्पर एवं सक्रिय रहता था इसलिए सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार मान कर व्यवहार करना हिन्दू और हिंदुत्व का चिंतन रहा है। 1800 ई. से पूर्व तक भारत का विश्व में 34% आर्थिक योगदान रहता था। परंतु अंग्रेजी शासनकाल के बाद यह स्थिति निरंतर गिरती गयी। पूर्व काल में शिक्षा के क्षेत्र में भारत निशुल्क शिक्षा प्रदान करता था और कई हस्तलिखित पुस्तकें हमारे पुस्तकालयों में होती थीं। सब तरह से संपन्न होने के बाद भी भारत अगर पराधीन हुआ तो इसका एक बड़ा कारण था हमारे समाज की एकजुटता न होना। बहुत से सामाजिक विषयों पर सामूहिक चिंतन का अभाव था। इसी कमजोरी का लाभ आक्रांताओं में उठाया। संघ के संस्थापक डॉ हेडगेवार जी ने इसी अभाव को समाप्त करने के लिए और हिन्दू समाज को एकजुट करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि जो लोग हिंदुत्व को संकीर्ण मानसिकता से देखते हैं वे पश्चिमी विचार से प्रभावित हैं। हिंदुत्व कोई रिलिजन न होकर एक विशाल परिभाषा है जिसमे सभी को अपने अपने विचार रखते हुए फलने फूलने की स्वतंत्रता है। आज समाज के अंदर सकारात्मक परिवर्तन के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा शताब्दी वर्ष में पञ्च परिवर्तन पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, स्व का बोध एवं नागरिक अनुशासन के विषय पर सभी की भूमिका का निवेदन किया । अंत में जिज्ञासा समाधान के सत्र में डॉ कृष्ण गोपाल ने प्रमुख लोगों के राष्ट्र, समाज और संघ के संदर्भ में पूछे गए विभिन्न प्रश्नों नशा निवारण, रोजगार, मतातंतरण चुनौती, के उत्तर भी दिए। हाल ही में यूजीसी कानून के ऊपर छिड़ी बहस पर पूछे गए प्रश्न पर भी संघ का दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए डॉ कृष्ण गोपाल ने कहा कि समाज के किसी भी वर्ग के व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। संघ समाज में सभी को समान भाव से सम्मान देने का पक्षधर है। वहीं इस अवसर पर प्रान्त प्रचारक संजय, वरिष्ठ संघ प्रचारक श्रीनिवास मूर्ति, हरीश, जितेंद्र, प्रान्त प्रचार प्रमुख प्रताप समयाल, महीधर सोलन विभाग संघचालक चंद्रशेखर, सोलन जिला संघचालक गुरदीप साहनी, राजगढ़ क्षेत्र से आए के प्रमुख व्यक्ति पद्मश्री विद्यानंद सरैक, नौणी विश्वविद्यालय कुलपति डॉ. राजेश्वर चंदेल, अरुण कैंथला, उषा शर्मा, उषा चौहान, निहाल चंद, अतुल गोयल, अनिल वर्मा, आदि उपस्थित रहे। संगोष्ठी में प्रशासनिक श्रेणी सीए, अधिवक्ताओं, डॉक्टर्स, प्रिंसिपल, शोधकर्ता, विद्यार्थियों, धार्मिक श्रेणी समाज की सभी श्रेणियों के करीब 500 प्रमुख जन मौजूद रहे।





