
शिमला: हिमाचल हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच दुश्मनी समाप्त करने और शांति की इच्छा व्यक्त करना देशद्रोह की श्रेणी में नहीं आता। न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की पीठ ने फेसबुक पर कथित रूप से प्रतिबंधित हथियारों और पाकिस्तानी झंडे की तस्वीरें साझा करने के आरोपी अभिषेक सिंह भारद्वाज को जमानत देते हुए यह टिप्पणी की। अभिषेक सिंह भारद्वाज को एक मुखबिर की सूचना के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि उसने अपने फेसबुक अकाउंट पर पाकिस्तानी झंडे तथा प्रतिबंधित हथियारों के फोटो-वीडियो पोस्ट किए थे। इसके अलावा, उस पर एक पाकिस्तानी नागरिक से संपर्क रखने, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की आलोचना करने और ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने के भी आरोप थे। हालांकि, गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई। अदालत ने रिकॉर्ड में मौजूद पेन ड्राइव के अवलोकन के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि आरोपी ने भारत-पाक के बीच जारी तनाव की आलोचना की और यह राय व्यक्त की कि युद्ध से किसी का भला नहीं होता। उसने सभी धर्मों के लोगों को आपसी सद्भाव के साथ रहने की अपील भी की थी। न्यायमूर्ति कैंथला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शांति की कामना करना और युद्ध का विरोध करना देशद्रोह नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि सरकार के प्रति असंतोष या विद्रोह की मंशा दर्शाने वाला कोई ठोस साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं है। खालिस्तान जिंदाबाद’ का नारा पोस्ट करने के आरोप पर अदालत ने टिप्पणी की कि केवल नारा पोस्ट कर देना, जब तक उससे असंतोष या विद्रोह की भावना स्पष्ट रूप से सिद्ध न हो, अपने-आप में अपराध नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि जमानत के प्रावधानों का उपयोग दोष सिद्ध होने से पहले किसी व्यक्ति को सजा देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, अदालत ने आरोपी पर कड़ी शर्तें लगाई हैं। जमानत के तहत वह न तो गवाहों को डराएगा और न ही सबूतों से छेड़छाड़ करेगा। उसे प्रत्येक सुनवाई में उपस्थित रहना होगा और बिना उचित कारण तारीख नहीं मांगनी होगी।





