शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने रेणुकाजी वन्यजीव अभयारण्य और वेटलैंड क्षेत्र के पर्यावरण संरक्षण को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने 19 से 24 नवंबर तक आयोजित होने वाले रेणुकाजी मेले के संबंध में आदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि रेणुका झील और परशुराम ताल के 100 मीटर के दायरे में किसी भी व्यावसायिक गतिविधि या स्टॉल लगाने की अनुमति नहीं होगी तथा दुकानें केवल मेला मैदान तक ही सीमित रहेंगी। इसके अलावा अभयारण्य क्षेत्र में लाउडस्पीकर के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा और प्रवेश द्वार पर ज्वाइंट फ्लाइंग स्क्वाड प्लास्टिक की जांच करेगा। श्रद्धालुओं व लोगों की सुविधा के लिए कम से कम 100 अस्थायी शौचालय बनाए जाएंगे। जबकि मेला समाप्त होने के तीन दिनों के भीतर दुकानदारों को स्टॉल हटाकर स्थल की सफाई सुनिश्चित करनी होगी। अदालत ने पशुपालन विभाग और पंचायतों को लावारिस पशुओं को मेला क्षेत्र से दूर रखने तथा अभयारण्य क्षेत्र में अवैध रूप से बने आश्रमों व दुकानों के अतिक्रमण को हटाने की कानूनी कार्रवाई जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं; इस मामले की अगली सुनवाई अब 15 दिसंबर को होगी।




