नेशनल डेस्क: केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने अदालत की अवमानना के नोटिस का जवाब देते हुए सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगी है। उन्होंने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया कि रायसीना हिल्स के चार किलोमीटर के दायरे में 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक, यानी 24 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करना कानून-व्यवस्था बिगड़ने से रोकने और शांति बनाए रखने के लिए अनिवार्य था। गृह सचिव ने हलफनामे में कहा कि कोर्ट के किसी भी निर्देश का जानबूझकर या सोच-समझकर उल्लंघन नहीं किया गया है और वह देश की सर्वोच्च अदालत का पूर्ण सम्मान करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के 11 अक्टूबर के नोटिस के जवाब में दाखिल चार पन्नों के हलफनामे में यह भी बताया गया कि यह निलंबन केवल सेलुलर (मोबाइल) इंटरनेट सेवाओं तक ही सीमित था, जबकि वाई-फाई और ब्रॉडबैंड जैसी गैर-सेलुलर इंटरनेट या दूरसंचार सेवाएं सुचारू रूप से चालू थीं। केंद्र सरकार ने कोर्ट से यह भी अनुरोध किया है कि भविष्य में जरूरत की परिस्थितियों और वैधानिक सुरक्षा उपायों के तहत सीमित अवधि के लिए इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने की अनुमति दी जाए।





