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दिसंबर 2027 से पहले कांग्रेस सरकार की बड़ी परीक्षा: निर्वाचन आयुक्त न मिलने से 3 नगर निगमों समेत 22 निकायों के चुनाव अधर में

शिमला: हिमाचल प्रदेश में स्थानीय शहरी निकायों (Urban Local Bodies) के चुनाव समय पर होने पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। स्टेट इलेक्शन कमिश्नर का पद पिछले दो महीने से खाली होने के कारण चुनाव की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही है। पूर्व निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची के 5 अगस्त को सेवानिवृत्त होने के बाद से यह पद रिक्त है, जिससे प्रदेश के 16 नगर निगमों, 3 नगर परिषदों और 3 नगर निगमों के कुल 194 पार्षद पदों के साथ-साथ अन्य उपचुनावों का कार्यक्रम भी अधर में लटक गया है। दिसंबर 2026 में प्रस्तावित इन चुनावों से पहले मतदाता सूची और वार्डबंदी जैसे अहम कार्य पांच-छह महीने पहले शुरू होने चाहिए थे, लेकिन आयोग के प्रमुख के न होने से तैयारियां ठप हैं। इससे पहले पंचायतीराज और 52 शहरी निकायों के चुनाव भी अदालत के हस्तक्षेप के चलते देरी से हुए थे। मई में भी आरक्षण रोस्टर और नए निकायों में दो साल के भीतर चुनाव कराने के कानून में बदलाव के कारण चुनाव टल गए थे। इन चुनावों में तीन नगर निगमों के चुनाव पार्टी चिन्ह पर होने हैं, जिससे दिसंबर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के लिए यह एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा साबित होंगे। तय समय पर चुनाव न होने से फिलहाल ये सभी निकाय प्रशासकों (Administrators) के सहारे चल रहे हैं, जिससे सड़क, सफाई, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और स्थानीय विकास कार्यों जैसी नागरिक सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं और जनता को अपने जनप्रितिनिधियों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। निर्वाचन आयुक्त की नई नियुक्ति के बाद ही चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी।

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