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डीजीपी ने NIT हमीरपुर के युवाओं से मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चल रहे एंटी-चिट्टा जन आंदोलन से जुड़ने का किया आह्वान

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हमीरपुर: NIT हमीरपुर के निमंत्रण पर हिमाचल प्रदेश पुलिस ने आज संस्थान के छात्रों के साथ संवाद किया। यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश के नेतृत्व में चल रहे एंटी-चिट्टा जन आंदोलन का हिस्सा था। इस दौरान युवा इंजीनियरों से आगे आकर चिट्टे के खिलाफ प्रदेश की लड़ाई में सक्रिय भागीदार बनने का आह्वान किया गया। NIT के ऑडिटोरियम में स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को संबोधित करते हुए DGP ने कहा कि 15 नवंबर, 2025 से मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शुरू हुआ एंटी-चिट्टा जन आंदोलन केवल सरकार या पुलिस का अभियान नहीं है। मुख्यमंत्री का आह्वान है कि हिमाचल का हर युवा इस मुहिम से जुड़े और चिट्टे के खिलाफ लड़ाई को सही मायनों में जन आंदोलन बनाए। छात्रों से सहज तरीके से जुड़ते हुए DGP ने अपने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दिनों को भी याद किया।उन्होंने छात्रों से कहा, “अगले कुछ मिनट मुझे केवल एक पुलिस अधिकारी या DGP के रूप में मत देखिए। मुझे ऐसे व्यक्ति के रूप में देखिए, जो उस रास्ते पर आपसे थोड़ा आगे चल चुका है, जिस पर आप अभी अपनी यात्रा शुरू कर रहे हैं। अपने पुलिस सेवा के सफर का जिक्र करते हुए उन्होंने छात्रों से कहा कि वे जीवन में लगातार सीखते रहें, आगे बढ़ते रहें और नए अवसर तलाशते रहें। उन्होंने युवाओं को भरोसा दिलाया कि हिमाचल प्रदेश पुलिस हमेशा उनके साथ है।यह कार्यक्रम में 25 वर्षीय महिला कांस्टेबल निकिता ने भी छात्रों से उन्हीं की उम्र के करीब एक युवा के रूप में बात की। उनका संदेश बहुत सीधा था—खुद को सुरक्षित रखें, अपने दोस्तों का ध्यान रखें और गलत बात देखकर चुप न रहें। उन्होंने कहा कि अगर कोई दोस्त नशे में फंस रहा है तो उसका मजाक बनाने, उसे बदनाम करने या उसके बारे में गॉसिप करने के बजाय उसकी मदद करें। वहीं, चिट्टा बेचकर युवाओं की जिंदगी बर्बाद करने और उससे पैसा कमाने वालों की जानकारी पुलिस को दें, ताकि उनके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जा सके। डीजीपी ने कहा कि पुलिस नशा तस्करों के खिलाफ पूरी सख्ती से कार्रवाई करती रहेगी, लेकिन चिट्टे के खिलाफ बड़ी लड़ाई तभी जीती जा सकती है, जब छात्र, माता-पिता, शिक्षक और समाज के लोग मुख्यमंत्री के एंटी-चिट्टा जन आंदोलन में बराबर के भागीदार बनें। हमीरपुर में आयोजित एंटी-चिट्टा वॉकाथॉन को याद करते हुए डीजीपी ने बताया कि उस दौरान वे तीन दिन NIT परिसर में ही रहे थे। उन्होंने NIT हमीरपुर के छात्रों को 16 सितंबर को ऊना में होने वाले एंटी-चिट्टा अभियान में शामिल होने का निमंत्रण दिया और संस्थान से एक-दो बसों में छात्रों को वहां भेजने पर विचार करने का आग्रह किया।छात्रों से कहा गया कि वे 112, हिमाचल प्रदेश पुलिस के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और WhatsApp चैनल के माध्यम से पुलिस के साथ जुड़े रहें। डीजीपी ने NIT हमीरपुर और हिमाचल प्रदेश पुलिस के बीच आपसी सहयोग को और मजबूत करने की बात भी कही। इसके लिए भविष्य में MoU करने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। NIT के छात्र और फैकल्टी साइबर क्राइम, टेक्नोलॉजी और आधुनिक पुलिसिंग से जुड़े प्रोजेक्ट्स में पुलिस की मदद कर सकते हैं। वहीं, हिमाचल प्रदेश पुलिस छात्रों को पुलिसिंग का व्यावहारिक अनुभव देने के साथ-साथ IPS, HPS और अन्य पुलिस सेवाओं में करियर बनाने के लिए मार्गदर्शन दे सकती है। डीजीपी ने कहा, “पुलिस समाज से अलग नहीं है। हर वर्दी के पीछे भी एक इंसान है। हम बहुत से काम अच्छे करते हैं, हमसे गलतियां भी होती हैं और जब हमसे कोई गलती हो तो उसे स्वीकार कर सुधारने की विनम्रता भी हमारे अंदर होनी चाहिए। कार्यक्रम के अंत में डीजीपी ने युवाओं से केसीधा आह्वान करते हुए कि मुख्यमंत्री ने चिट्टे के खिलाफ इस लड़ाई को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया है। अब इस आंदोलन को आपकी ऊर्जा, आपके विचार और आपकी आवाज की जरूरत है। आगे आइए और इससे जुड़िए। केवल दर्शक बनकर मत रहिए। अपने दोस्तों, अपनी पीढ़ी और हिमाचल के भविष्य को बचाने की इस मुहिम में भागीदार बनिए।

 

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