लाइव हिमाचल/सोलन: हिमाचल प्रदेश के निर्माता एवं प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार के अथक प्रयासों से ही आज राज्य वैश्विक पटल पर अपनी मजबूत पहचान बना सका है। साधनहीनता के दौर में भी धरतीपुत्र डॉ. परमार ने पैदल यात्राएं कर प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक समझ विकसित की। ब्रिटिश काल में शिमला हिल स्टेट्स और हिमालय प्रांत जैसे नामों से पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र को ‘हिमाचल प्रदेश’ नाम देने का ऐतिहासिक श्रेय सोलन शहर को जाता है। 26 जनवरी 1948 को बघाट रियासत के राजा दुर्गा सिंह की अध्यक्षता में सोलन के बघाट हॉल में आयोजित बैठक में इस पर्वतीय अंचल का नामकरण ‘हिमाचल प्रदेश’ किया गया था। तत्पश्चात 15 अप्रैल 1948 को हिमाचल प्रदेश केंद्र शासित मुख्य आयुक्त प्रांत के रूप में अस्तित्व में आया। डॉ. परमार के सशक्त राजनीतिक और संवैधानिक संघर्ष के बल पर प्रदेश को ‘पार्ट सी स्टेट’ का दर्जा मिला और 24 मार्च 1952 को उन्होंने राज्य के पहले मुख्यमंत्री के रूप में बागडोर संभाली। पड़ोसी राज्य पंजाब द्वारा हिमाचल के विलय की कोशिशों के बावजूद डॉ. परमार ने राज्य के अस्तित्व और पुनर्गठन के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। नतीजतन 1 नवंबर 1966 को पंजाब के पर्वतीय क्षेत्रों—कांगड़ा, कुल्लू, लाहुल-स्पीति और शिमला—का विलय कर ‘विशाल हिमाचल’ का सपना साकार हुआ। प्रशासनिक सुगमता और सांस्कृतिक एकजुटता को ध्यान में रखते हुए 1 सितंबर 1972 को तत्कालीन महासू जिले का विभाजन कर सोलन जिले की नींव रखी गई। 12 पुरानी ठकुराइयों के समृद्ध इतिहास और माता शूलिनी के आशीर्वाद को समेटे सोलन जिला आज प्रदेश के सर्वांगीण विकास का पर्याय बन चुका है। वर्तमान में सोलन न केवल हिमाचल बल्कि पूरे देश का एक प्रमुख शैक्षणिक और औद्योगिक केंद्र बन चुका है। एशिया में विशेष पहचान रखने वाले डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के साथ-साथ जिले में 8 प्रमुख विश्वविद्यालय संचालित हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय खुंभ अनुसंधान केंद्र के कारण इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ‘मशरूम सिटी’ और विशाल टमाटर उत्पादन के चलते भारत में ‘रेड गोल्ड ऑफ सिटी’ का दर्जा प्राप्त है। कसौली, चायल, डगशाई और धर्मपुर जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों, समृद्ध कृषि-बागवानी और प्राकृतिक सौंदर्य के बूते सोलन जिला आज देश-दुनिया के पर्यटकों की पहली पसंद बनने के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार और राज्य की आर्थिकी का मुख्य स्तंभ साबित हो रहा है।





