शिमला : हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों (ट्राइबल एरिया) से स्वास्थ्य को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चंबा के पांगी व भरमौर, किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों में किए गए एक विशेष सर्वेक्षण में यह खुलासा हुआ है कि इन क्षेत्रों की करीब 20 प्रतिशत आबादी में यौन संचारित रोगों (STD) से जुड़े लक्षण पाए गए हैं। 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग के 3000 लोगों पर किए गए इस अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि इन दुर्गम इलाकों में ‘सेफ सेक्सुअल प्रेक्टिस’ को लेकर स्थिति काफी चिंताजनक है। सर्वे में शामिल 33.1 प्रतिशत लोगों ने माना कि उन्होंने कभी कंडोम का इस्तेमाल नहीं किया, जबकि मात्र 16.8 प्रतिशत लोग ही हमेशा इसका उपयोग करते हैं। जिलों के आंकड़ों पर गौर करें तो चंबा में सबसे ज्यादा 24.2% लोगों में संक्रमण के लक्षण मिले हैं, इसके बाद किन्नौर में 20.1% और लाहौल-स्पीति में 15.7% मामले सामने आए हैं। इस स्वास्थ्य चुनौती के लगातार बढ़ने के पीछे मुख्य रूप से चार बड़े कारण सामने आए हैं। पहला कारण यह है कि 72% लोगों को STD की बुनियादी जानकारी तो है, लेकिन इससे बचाव को लेकर समझ बेहद कम है; केवल 46.6% लोग ही जानते हैं कि कंडोम से इसका बचाव संभव है, जबकि 52.4% लोग इस गलतफहमी में हैं कि उन्हें यह बीमारी हो ही नहीं सकती। दूसरा कारण इलाज को बीच में ही छोड़ देना है; हालांकि राहत की बात है कि 90.2% लोग इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों पर भरोसा जताते हैं, लेकिन इनमें से केवल 12.3% मरीज ही अपना कोर्स पूरा करते हैं। वहीं, सिर्फ 2.9% मामलों में ही संक्रमित व्यक्ति के साथ उनके पार्टनर का इलाज कराया गया। तीसरे और चौथे कारण के रूप में सामाजिक झिझक और बुनियादी ढांचे की कमी को देखा जा रहा है। ट्राइबल इलाकों में सामाजिक शर्म और बीमारी छिपाने की प्रवृत्ति के कारण लोग समय पर डॉक्टर के पास नहीं जाते, जिसमें महिलाएं अपनी समस्याओं को बताने में सबसे ज्यादा संकोच करती हैं। इसके साथ ही, इन दूरदराज के क्षेत्रों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, अस्पतालों की लंबी दूरी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी भी इलाज में बड़ी बाधा बनी हुई है। रिपोर्ट का सबसे डरावना पहलू यह है कि यहाँ HIV और हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों को लेकर जागरूकता न के बराबर है और केवल 2% लोगों ने ही कभी इसकी जांच करवाई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अब इन इलाकों में नियमित स्वास्थ्य शिविर लगाने, मोबाइल मेडिकल यूनिट बढ़ाने, गोपनीय जांच की सुविधा देने और महिला स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती बढ़ाने की मजबूत सिफारिश की है।





