शिमला: हिमाचल प्रदेश के वन्यजीव अभयारण्यों में घूमना, फोटोग्राफी करना और रिसर्च करना अब और महंगा हो गया है। प्रदेश सरकार ने वन्यजीव संरक्षण नियम 1975 में बड़ा बदलाव करते हुए ‘वन्य जीव संरक्षण हिमाचल प्रदेश संशोधन नियम 2026’ लागू कर दिया है, जिसकी अधिसूचना अतिरिक्त मुख्य सचिव वन केके पंत द्वारा जारी की गई है। नए नियमों के मुताबिक, अब भारतीय नागरिकों को सेंचुरी क्षेत्र में प्रवेश और फोटोग्राफी के लिए पहले तीन दिन 300 रुपये प्रतिदिन और उसके बाद 500 रुपये प्रतिदिन का शुल्क देना होगा, जबकि विदेशी नागरिकों के लिए यह दर पहले तीन दिन 600 रुपये और अतिरिक्त दिनों के लिए 1000 रुपये तय की गई है। हालांकि, पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए एंट्री बिल्कुल मुफ्त है और स्कूली छात्रों को आधी कीमत पर टिकट मिलेगा, वहीं मोबाइल कैमरों का इस्तेमाल पूरी तरह फ्री रहेगा। गाड़ियों की बात करें तो हल्के वाहनों के लिए 1000 रुपये और भारी वाहनों के लिए 2000 रुपये प्रतिदिन का अतिरिक्त चार्ज लगेगा। इसके अलावा, प्रोफेशनल स्टिल कैमरों के लिए भारतीयों को शुरुआती तीन दिन 625 रुपये प्रतिदिन और विदेशियों को दोगुनी दर यानी 1250 रुपये देने होंगे। बड़े स्तर पर वीडियोग्राफी के लिए सिने कैमरों का शुल्क भारतीयों के लिए पहले तीन दिन 12,500 रुपये और बाद में 18,500 रुपये प्रतिदिन होगा। वहीं, ड्रोन उड़ाने के लिए मुख्य वन्यजीव वार्डन की विशेष अनुमति अनिवार्य होगी, जिसके लिए निजी एजेंसियों और मीडिया हाउसेज को पहले तीन दिन 50,000 रुपये और अतिरिक्त दिनों के लिए 75,000 रुपये प्रतिदिन की भारी-भरकम फीस चुकानी होगी। वन्यजीवों पर शोध यानी रिसर्च करने वाले भारतीय नागरिकों के लिए 100 रुपये और विदेशी नागरिकों के लिए 500 रुपये प्रतिदिन का शुल्क तय किया गया है जबकि वन विभाग के उपकरण किराए पर लेने के लिए 200 रुपये से लेकर 1250 रुपये प्रतिदिन तक का खर्च आएगा। राज्य सरकार के पास इन सभी दरों को समय-समय पर संशोधित करने का पूरा अधिकार रहेगा।





